फ़ेसबुक और ट्विटर पर एक वीडियो शेयर करते हुए दावा किया गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 राज्यों में लॉकडाउन की घोषणा की है. 22 नवंबर को फ़ेसबुक यूज़र खुर्रम सिद्दीकी ने ये वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा, “5 राज्यों में लॉकडाउन लगाने को मिली मंजूरी, प्रधानमंत्री मोदी ने किया ऐलान,” इस वीडियो में ब्रेकिंग न्यूज़ बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य कुछ केन्द्रीय मंत्रियों की तस्वीरें फ़्लैश हो रही हैं. वीडियो के बैकग्राउंड में वॉइस ओवर चल रहा है जिसमें दावा किया गया कि देश में दुबारा से लॉकडाउन जारी किया जाएगा. आर्टिकल लिखे जाने तक वीडियो को 45 लाख से ज़्यादा व्यूज़ मिले हैं. (पोस्ट का आर्काइव लिंक)

 

5 राज्यों में लॉकडाउन लगाने को मिली मंजूरी, प्रधानमंत्री मोदी ने किया ऐलान,

Posted by Khurram siddiqui on Saturday, 21 November 2020

फ़ेसबुक पेज ‘STF News’ ने यही दावा करते हुए एक और वीडियो पोस्ट किया है. (पोस्ट का आर्काइव लिंक)

फ़ैक्ट-चेक

हमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की देश में लॉकडाउन जारी करने की घोषणा के बारे में कोई मीडिया रिपोर्ट नहीं मिली. ये बात लगभग असंभव है कि प्रधानमंत्री देश में लॉकडाउन जारी करने की घोषणा करें और मीडिया इस बारे में कोई रिपोर्ट पब्लिश न करे.

इसके अलावा, प्रधानमंत्री कार्यालय और नरेंद्र मोदी के पर्सनल ट्विटर अकाउंट्स खंगालने पर भी हमें लॉकडाउन के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली.

24 नवंबर को नरेंद्र मोदी ने राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बातचीत की थी. इस बैठक में उन्होंने देश को एक वैक्सीन मुहैया करवाने और उसके वितरण के बारे में चर्चा की थी. 24 नवंबर की आज तक की रिपोर्ट के मुताबिक, “केंद्र पहले ही साफ कर चुका है कि राज्यों को अलग से वैक्सीन का इंतजाम करने की जरूरत नहीं होगी बल्कि केंद्र सरकार सभी राज्यों को वैक्सीन मुहैया कराएगी. सरकार की योजना के मुताबिक सबसे पहले स्वास्थ्यकर्मियों और बुजुर्गों को वैक्सीन दी जाएगी.” इस बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने फिर से लॉकडाउन लगाने को लेकर कोई घोषणा की हो, ऐसी कोई मीडिया रिपोर्ट नहीं मिली.

यहां गौर करने वाली बात है कि देश में कोरोना के बढ़ते मामलों और कुछ राज्यों में कोरोना वायरस की गंभीर स्थिति को देखते हुए दिल्ली, गुजरात, राजस्थान, हरियाणा जैसे कुछ राज्यों ने पाबंदियां और कर्फ़्यू लगाये हैं. लेकिन इस आर्टिकल के लिखे जाने तक पूर्ण रूप से किसी भी राज्य में लॉकडाउन करने की कोई जानकारी नहीं मिली.

कुल मिलाकर, एक मनगढ़ंत दावे को ब्रेकिंग न्यूज़ बताते हुए सोशल मीडिया पर देश में लॉकडाउन जारी करने का झूठा दावा शेयर किया गया.


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Alt News

सोशल मीडिया पर 52 सेकेंड की एक वीडियो वायरल हो रही है। इस वीडियो में एक महिला को TRS का पोस्टर फाड़ते हुए देखा जा सकता है। दावा किया जा रहा है कि लोग टीआरएस से परेशान हो चुके हैं इसलिए महिला ने TRS का पोस्टर फाड़ डाला।

वायरल पोस्ट के आर्काइव वर्ज़न को यहां, यहां और यहां देखा जा सकता है।

फेसबुक पर इस दावे को अलग-अलग यूज़र्स द्वारा शेयर किया जा रहा है।

https://www.facebook.com/115842199814577/videos/454799489252178

देखा जा सकता है कि ट्विटर पर इस दावे को अलग-अलग यूज़र्स द्वारा शेयर किया जा रहा है।

Fact Checking/Verification

TRS का पोस्टर फाड़ रही महिला की सत्यता जानने के लिए हमने पड़ताल शुरु की। InVID की मदद से मिले कीफ्रेम्स को Google Reverse Image Search करने पर हमें कुछ परिणाम मिले।  

TRS का पोस्टर फाड़ रही महिला की वीडियो को भ्रामक दावे के साथ किया गया शेयर

पड़ताल के दौरान हमें AH News नामक चैनल पर 22 नवंबर, 2002 को अपलोड की गई एक वीडियो मिली। यहां पर वायरल वीडियो के लंबे वर्ज़न को देखा जा सकता है।

इस वीडियो को देखने के बाद हमने जाना कि वीडियो में पोस्ट को फाड़ती हुई नज़र आ रही महिला तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी (Telangana Pradesh Congress Committee (TPCC) की जनरल सेक्रेटरी उज़मा शकीर (Uzma Shakir) हैं।

अधिक खोजने पर हमें Deccan Daily  के आधिकारिक चैनल पर 22 नवंबर, 2020 को अपलोड की गई वीडियो मिली। इस वीडियो में बताया गया है कि TRS के हॉर्डिंग्स को कांग्रेस के वर्कर्स द्वारा हटाया जा रहा है। कैप्टन उत्तम कुमार रेड्डी द्वारा इलेक्शन कमीशन (Election Commission) में शिकायत की गई थी। लेकिन इसके बावजूद उन्होंने कोई एक्शन नहीं लिया है। इसलिए कांग्रेस के वर्कर्स को आगे आकर उनका काम करना पड़ रहा है।

वायरल दावे की तह तक जाने के लिए हमने Election Commission of India की आधिकारिक वेबसाइट को खंगाला। पड़ताल के दौरान हमने जाना कि केंद्र या राज्यों में सत्ता में राजनीतिक दलों की उपलब्धियों को दर्शाने वाले बैनर, होर्डिंग्स, विज्ञापन आदि को चुनाव आयोग द्वारा तिथि की घोषणा होने के बाद नहीं लगाया जाता है।  

https://eci.gov.in/faqs/mcc/model-code-of-conduct-r15/

Uzma Shakir को हमने फेसबुक पर खंगाला। पड़ताल के दौरान हमें उनकी प्रोफाइल पर 14 नवंबर, 2020 की एक पोस्ट मिली। इस पोस्ट में वायरल वीडियो में नज़र आ रही महिला को देखा जा सकता है।

वायरल वीडियो और फेसबुक पोस्ट में शेयर की गई तस्वीर में समानताएं साफ़ दिख रही हैं।

TRS का पोस्टर फाड़ रही महिला की वीडियो को भ्रामक दावे के साथ किया गया शेयर

Conclusion

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो रही वीडिया का बारीकी से अध्ययन करने पर हमने पाया कि वीडियो में TRS का पोस्टर फाड़ रही महिला उज़मा शकीर हैं। वीडियो में नजर आ रही महिला राजनैतिक दल से जुड़ी हैं। हमारी पड़ताल में साफ हो गया कि आम जनता टीआरएस के पोस्टर को नहीं फाड़ रही है।


Result: Misleading


Our Sources

YouTube https://www.youtube.com/watch?v=tjLT-p8GfLA&ab_channel=DeccanDaily

YouTube https://www.youtube.com/watch?v=gJqNzPAinN4&ab_channel=AHNEWS

Election Commission of India https://eci.gov.in/faqs/mcc/model-code-of-conduct-r15/

Facebook https://www.facebook.com/uzma.ashaii/photos/1880237508782783


किसी संदिग्ध ख़बर की पड़ताल, संशोधन या अन्य सुझावों के लिए हमें WhatsApp करें: 9999499044  या ई-मेल करें: [email protected]



NC Hindi

सोशल मीडिया पर 52 सेकेंड की एक वीडियो वायरल हो रही है। इस वीडियो में एक महिला को TRS का पोस्टर फाड़ते हुए देखा जा सकता है। दावा किया जा रहा है कि सार्वजनिक धन का दुरूपयोग बंद करो। लोग टीआरएस से परेशान आ चुके हैं इसलिए महिला ने TRS का पोस्टर फाड़ डाला।

वायरल पोस्ट के आर्काइव वर्ज़न को यहां, यहां और यहां देखा जा सकता है।

फेसबुक पर इस दावे को अलग-अलग यूज़र्स द्वारा शेयर किया जा रहा है।

https://www.facebook.com/115842199814577/videos/454799489252178

देखा जा सकता है कि ट्विटर पर इस दावे को अलग-अलग यूज़र्स द्वारा शेयर किया जा रहा है।

Fact Checking/Verification

TRS का पोस्टर फाड़ रही महिला की सत्यता जानने के लिए हमने पड़ताल शुरु की। InVID की मदद से मिले कीफ्रेम्स को Google Reverse Image Search करने पर हमें कुछ परिणाम मिले।  

TRS का पोस्टर फाड़ रही महिला की वीडियो को भ्रामक दावे के साथ किया गया शेयर

पड़ताल के दौरान हमें AH News नामक चैनल पर 22 नवंबर, 2002 को अपलोड की गई एक वीडियो मिली। यहां पर वायरल वीडियो के लंबे वर्ज़न को देखा जा सकता है।

इस वीडियो को देखने के बाद हमने जाना कि वीडियो में पोस्ट को फाड़ती हुई नज़र आ रही महिला तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी (Telangana Pradesh Congress Committee (TPCC) की जनरल सेक्रेटरी उज़मा शकीर (Uzma Shakir) हैं।

अधिक खोजने पर हमें Deccan Daily  के आधिकारिक चैनल पर 22 नवंबर, 2020 को अपलोड की गई वीडियो मिली। इस वीडियो में बताया गया है कि TRS के हॉर्डिंग्स को कांग्रेस के वर्कर्स द्वारा हटाया जा रहा है। कैप्टन उत्तम कुमार रेड्डी द्वारा इलेक्शन कमीशन (Election Commission) में शिकायत की गई थी। लेकिन इसके बावजूद उन्होंने कोई एक्शन नहीं लिया है। इसलिए कांग्रेस के वर्कर्स को आगे आकर उनका काम करना पड़ रहा है।

वायरल दावे की तह तक जाने के लिए हमने Election Commission of India की आधिकारिक वेबसाइट को खंगाला। पड़ताल के दौरान हमने जाना कि केंद्र या राज्यों में सत्ता में राजनीतिक दलों की उपलब्धियों को दर्शाने वाले बैनर, होर्डिंग्स, विज्ञापन आदि को चुनाव आयोग द्वारा तिथि की घोषणा होने के बाद नहीं लगाया जाता है।  

https://eci.gov.in/faqs/mcc/model-code-of-conduct-r15/

Uzma Shakir को हमने फेसबुक पर खंगाला। पड़ताल के दौरान हमें उनकी प्रोफाइल पर 14 नवंबर, 2020 की एक पोस्ट मिली। इस पोस्ट में वायरल वीडियो में नज़र आ रही महिला को देखा जा सकता है।

वायरल वीडियो और फेसबुक पोस्ट में शेयर की गई तस्वीर में समानताएं साफ़ दिख रही हैं।

TRS का पोस्टर फाड़ रही महिला की वीडियो को भ्रामक दावे के साथ किया गया शेयर

Conclusion

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो रही वीडिया का बारीकी से अध्ययन करने पर हमने पाया कि वीडियो में TRS का पोस्टर फाड़ रही महिला उज़मा शकीर हैं। वीडियो में नजर आ रही महिला राजनैतिक दल से जुड़ी हैं। हमारी पड़ताल में साफ हो गया कि आम जनता टीआरएस के पोस्टर को नहीं फाड़ रही है।


Result: False


Our Sources

YouTube https://www.youtube.com/watch?v=tjLT-p8GfLA&ab_channel=DeccanDaily

YouTube https://www.youtube.com/watch?v=gJqNzPAinN4&ab_channel=AHNEWS

Election Commission of India https://eci.gov.in/faqs/mcc/model-code-of-conduct-r15/

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भाजपा प्रवक्ता तेजिंदर सिंह बग्गा ने एक 30 सेकंड का क्लिप ट्वीट करते हुए लिखा, “फ़ॉक्सवेगन का आतंकवादियों वाला विज्ञापन. दिलचस्प?” (ट्वीट का आर्काइव लिंक) ट्वीट में शामिल वीडियो 53 हज़ार से ज़्यादा बार देखा जा चुका है. उन्होंने इसे फे़सबुक पर भी शेयर किया है. ऑल्ट न्यूज़ ने तजिंदर बग्गा द्वारा फैलाई गयी कई ग़लत सूचनाओं की सच्चाई पहले भी बताई है.

इस वीडियो को कई फे़सबुक और ट्विटर यूज़र्स ने ऐसे ही कैप्शन के साथ शेयर किया. कई लोगों ने ये वीडियो शेयर किया जिसमें बैकग्राउंड में अरबी संगीत बज रहा है. कैप्शन के मुताबिक ये विज्ञापन मुस्लिम समुदाय का ‘मज़ाक उड़ाने’ के लिए बनाया गया है. लोगों ने लिखा, “जर्मनी की ऑटोमोबाइल कंपनी फॉक्सवैगन ने इन शांति दूतों का जमकर मजाक उड़ाया है शांतिदूत आतंकी फॉक्सवैगन की कार में बम लेकर ब्लास्ट करना चाहता है लेकिन कार इतना मजबूत है कि ब्लास्ट नहीं होता अगर ऐसा ऐड किसी भारतीय कंपनी ने बनाया होता तो अब तक इस्लाम खतरे में आ गया होता.”

इसे ट्विटर यूज़र @SonuSri795 (आर्काइव लिंक) ने शेयर किया जिसे 700 से ज़्यादा बार रीट्वीट किया गया है. आकाश RSS ने भी इसे शेयर किया जो अक्सर भ्रामक सूचनाएं शेयर करता रहता है. (आर्काइव लिंक)

15 साल पुराने पैरोडी वीडियो को सांप्रदायिक ऐंगल देकर शेयर किया गया

ऑल्ट न्यूज़ ने यूट्यूब पर की-वर्ड सर्च किया और पाया कि ये वीडियो 2006 में यूट्यूब पर अपलोड किया गया था. डिस्क्रिप्शन में बताया गया है कि ये एक पैरोडी वीडियो है.

अमेरिकी न्यूज़ संगठन ABC 10 News ने इस दावे को ग़लत बताया था कि फ़ॉक्सवेगन ने इस विज्ञापन में एक सुसाइड बॉम्बर को दिखाया है. इस वीडियो को वायरल ब्राण्ड कम्युनिकेशन एक्सपर्ट ‘ली एंड डैन’ ने बनाया था न कि खुद फ़ॉक्सवेगन ने.

इस पैरोडी वीडियो के बारे में 2005 में द गार्डियन और द न्यू यॉर्क टाइम्स ने भी रिपोर्ट किया था. डैन ने ब्रांड रिपब्लिक से कहा था, “ये वीडियो वही दिखा रहा है जो लोग रोज़ न्यूज़ में देखते हैं. ये कार उस हीरो की तरह है जो बेगुनाह लोगों को बुरे इरादे रखने वालों से बचाता है. अगर इससे किसी की भावनाएं आहत हुईं हैं तो हम उसके लिए माफ़ी मांगते हैं.”

एक 15 साल पुराने और ‘मज़ाकिया’ वीडियो को शेयर करते हुए कई सोशल मीडिया यूज़र्स ने ग़लत दावा किया कि फ़ॉक्सवेगन ने विज्ञापन में सुसाइड बॉम्बर दिखा कर मुस्लिमों का ‘मज़ाक’ बनाया

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सोशल मीडिया पर योग करते एक व्यक्ति का वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो में व्यक्ति को योगा के कई आसन करते हुए देखा जा सकता है। वीडियो शेयर करने वाले यूज़र का दावा है कि वीडियो में दिखने वाले व्यक्ति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं।

ट्वीट का आर्काइव लिंक यहाँ देखें।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को कुछ अन्य यूज़र्स ने भी शेयर किया है।

Fact Check / Verification

ट्विटर पर वायरल योग करते एक व्यक्ति का वीडियो काफ़ी पुराना है, साथ ही वीडियो में दिख रहे व्यक्ति का चेहरा भी धुंधला है, इसलिए यह कह पाना कि वीडियो में दिख रहे व्यक्ति भारत के मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं थोड़ा मुश्किल है। इसीलिए वायरल हो रहे दावे का सच जानने के लिए हमने पड़ताल आरम्भ की। पड़ताल के दौरान सबसे पहले वीडियो को InVid टूल के माध्यम से कुछ कीफ्रेम्स में तोड़ा और फिर गूगल पर यांडेक्स इमेज टूल के माध्यम से खोजना शुरू किया।

खोज के दौरान हमें वायरल वीडियो यूट्यूब पर Forma नाम के चैनल पर 11 सितंबर साल 2020 को अपलोड मिला। यूट्यूब पर अपलोड हुए वीडियो के साथ कैप्शन में जानकारी देते हए ‘BKS Iyengar 1938 newsreel’ लिखा हुआ है।

इसके बाद हमने यूट्यूब पर ‘BKS Iyengar 1938’ को कीवर्ड्स के तौर पर इस्तेमाल कर खोजना शुरू किया। जहां हमें वायरल वीडियो MCPetruk नाम के यूट्यूब चैनल पर साल 2006 में अपलोड हुए एक वीडियो में मिला।

गौरतलब है कि यूट्यूब पर प्राप्त वीडियो के कैप्शन में जानकारी देते हुए बताया गया है कि उक्त वीडियो साल 1938 में शूट किया गया है, जबकि प्रधानमंत्री मोदी का जन्म 17 सितंबर साल 1950 में हुआ था। इसके बाद हमने गूगल पर BKS Iyengar के बारे में खोजना शुरू किया।

इस दौरान wikipedia पर मिली जानकारी से पता चला कि BKS Iyengar ‘अय्यंगार योग कसरत’ के संस्थापक थे। साथ ही वह योग पर लिखी कई किताबों के लेखक भी थे।

 वीडियो योगा  नरेंद्र मोदी

पड़ताल के दौरान Times of India की वेबसाइट पर छपे एक लेख से भी दिवंगत BKS Iyengar के बारे में जानकारी मिली। लेख में बताया गया है कि Iyengar की मृत्यु 96 साल की उम्र में पुणे के एक अस्पताल में हुई थी।

 वीडियो योगा  नरेंद्र मोदी

खोज दौरान हमें गूगल पर Iyengar Yoga की वेबसाइट भी मिली। जहां BKS Iyengar और Iyengar योगा के बारे में जानकारी दी गयी है।

Conclusion

वायरल वीडियो के साथ शेयर हो रहे दावे की पड़ताल के दौरान हमें उपरोक्त मिले तथ्यों से पता चला कि वायरल वीडियो में योग करते दिख रहे व्यक्ति प्रधानमंत्री मोदी नहीं बल्कि दिवंगत BKS Iyengar हैं, जिन्हें Iyengar योग का संस्थापक कहा जाता है। इनकी मृत्यु साल 2014 में हो चुकी है।

Result- Misleading

Our Sources

https://iynaus.org/iyengar-yoga/about

https://timesofindia.indiatimes.com/life-style/spotlight/Yoga-instructor-BKS-Iyengar-dies-at-96/articleshow/40669408.cms

https://www.youtube.com/watch?v=lmOUZQi_6Tw&t=16s

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सोशल मीडिया पर योग करते एक व्यक्ति का वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो में व्यक्ति को योगा के कई आसन करते हुए देखा जा सकता है। वीडियो शेयर करने वाले यूज़र का दावा है कि वीडियो में दिखने वाले व्यक्ति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं।

ट्वीट का आर्काइव लिंक यहाँ देखें।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को कुछ अन्य यूज़र्स ने भी शेयर किया है।

Fact Check / Verification

ट्विटर पर वायरल योग करते एक व्यक्ति का वीडियो काफ़ी पुराना है, साथ ही वीडियो में दिख रहे व्यक्ति का चेहरा भी धुंधला है, इसलिए यह कह पाना कि वीडियो में दिख रहे व्यक्ति भारत के मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं थोड़ा मुश्किल है। इसीलिए वायरल हो रहे दावे का सच जानने के लिए हमने पड़ताल आरम्भ की। पड़ताल के दौरान सबसे पहले वीडियो को InVid टूल के माध्यम से कुछ कीफ्रेम्स में तोड़ा और फिर गूगल पर यांडेक्स इमेज टूल के माध्यम से खोजना शुरू किया।

खोज के दौरान हमें वायरल वीडियो यूट्यूब पर Forma नाम के चैनल पर 11 सितंबर साल 2020 को अपलोड मिला। यूट्यूब पर अपलोड हुए वीडियो के साथ कैप्शन में जानकारी देते हए ‘BKS Iyengar 1938 newsreel’ लिखा हुआ है।

इसके बाद हमने यूट्यूब पर ‘BKS Iyengar 1938’ को कीवर्ड्स के तौर पर इस्तेमाल कर खोजना शुरू किया। जहां हमें वायरल वीडियो MCPetruk नाम के यूट्यूब चैनल पर साल 2006 में अपलोड हुए एक वीडियो में मिला।

गौरतलब है कि यूट्यूब पर प्राप्त वीडियो के कैप्शन में जानकारी देते हुए बताया गया है कि उक्त वीडियो साल 1938 में शूट किया गया है, जबकि प्रधानमंत्री मोदी का जन्म 17 सितंबर साल 1950 में हुआ था। इसके बाद हमने गूगल पर BKS Iyengar के बारे में खोजना शुरू किया।

इस दौरान wikipedia पर मिली जानकारी से पता चला कि BKS Iyengar ‘अय्यंगार योग कसरत’ के संस्थापक थे। साथ ही वह योग पर लिखी कई किताबों के लेखक भी थे।

 वीडियो योगा  नरेंद्र मोदी

पड़ताल के दौरान Times of India की वेबसाइट पर छपे एक लेख से भी दिवंगत BKS Iyengar के बारे में जानकारी मिली। लेख में बताया गया है कि Iyengar की मृत्यु 96 साल की उम्र में पुणे के एक अस्पताल में हुई थी।

 वीडियो योगा  नरेंद्र मोदी

खोज दौरान हमें गूगल पर Iyengar Yoga की वेबसाइट भी मिली। जहां BKS Iyengar और Iyengar योगा के बारे में जानकारी दी गयी है।

Conclusion

वायरल वीडियो के साथ शेयर हो रहे दावे की पड़ताल के दौरान हमें उपरोक्त मिले तथ्यों से पता चला कि वायरल वीडियो में योग करते दिख रहे व्यक्ति प्रधानमंत्री मोदी नहीं बल्कि दिवंगत BKS Iyengar हैं, जिन्हें Iyengar योग का संस्थापक कहा जाता है। इनकी मृत्यु साल 2014 में हो चुकी है।

Result- Misleading

Our Sources

https://iynaus.org/iyengar-yoga/about

https://timesofindia.indiatimes.com/life-style/spotlight/Yoga-instructor-BKS-Iyengar-dies-at-96/articleshow/40669408.cms

https://www.youtube.com/watch?v=lmOUZQi_6Tw&t=16s

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  • By Vishvas News
  • Updated: November 25, 2020


नई दिल्ली (विश्वास टीम): हाल ही में, भारत में ऑस्ट्रेलिया के उच्चायुक्त बैरी ओ’फैरेल ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत से नागपुर में मुलाकात की। इन रिपोर्टों के बीच, ऑस्ट्रेलियाई उच्चायुक्त की एक तस्वीर वायरल हो रही है, जहां एक व्यक्ति को नमस्ते करते हुए देखा जा सकता है। इस फोटो को वायरल करते हुए लोग ये दावा कर रहे हैं कि ऑस्ट्रेलिया के उच्चायुक्त बैरी ओ’फैरेल के साथ तस्वीर में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत हैं। हालांकि, भारत दौरे के दौरान ऑस्ट्रेलियाई उच्चायुक्त ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से मुलाकात ज़रूर की थी, मगर विश्वास न्यूज़ ने अपनी जांच में पाया कि वायरल तस्वीर में ऑस्ट्रेलियाई उच्चायुक्त के साथ दिख रहे व्यक्ति मोहन भागवत नहीं, बल्कि विकास तैलंग है।

क्या है वायरल पोस्ट में?

इस पोस्ट को मेघ अपडेट्स @MeghUpdates नाम के ट्विटर हैंडल द्वारा साझा किया गया था। उपयोगकर्ता ने दावा किया, “In a Burnol Movement Australian High Commissioner meets @RSSorg Chief Dr Mohan Bhagwat and acknowledges the Organisation’s work in #Covid relief“

इस पोस्ट के आर्काइव लिंक को यहां देखा जा सकता है।

पड़ताल

Vishvas News ने एक सरल कीवर्ड खोज के साथ अपनी जांच शुरू की। हमने पाया कि भारत में ऑस्ट्रेलियाई उच्चायुक्त, बैरी ओ’फैरेल से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत की नागपुर में मुलाकात हुई थी। इस मुलाकात पर द इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट भी मिली, जिसकी हेडलाइन थी “ऑस्ट्रेलियाई उच्चायुक्त नागपुर में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से मिले।”

पूरी रिपोर्ट यहां पढ़ें।

रिपोर्ट में ऑस्ट्रेलियाई उच्चायुक्त द्वारा किए गए ट्वीट्स का इस्तेमाल किया गया था। इसी ट्वीट में वायरल तस्वीर भी देखी जा सकती है। यह तस्वीर बैरी ओ’फैरेल के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर साझा की गई चार तस्वीरों में से एक थी।

तस्वीरों को करीब से देखने पर हमने पाया कि बैरी ओ’फैरेल द्वारा साझा की गई तीन तस्वीरों में वास्तव में आरएसएस प्रमुख डॉ मोहन भागवत हैं। हालांकि, चौथी (वायरल) तस्वीर में व्यक्ति डॉ मोहन भागवत नहीं है।

हमने फिर से इस तस्वीर को ढूंढा। हमने पाया कि नागपुर में RSS की दो इमारतें हैं। एक महल, जो नागपुर में मुख्यालय है और दूसरा रेशमबाग में है, जो हेडगेवार स्मृति मंदिर है।

रिपोर्ट के अनुसार, ऑस्ट्रेलियाई उच्चायुक्त डॉ मोहन भागवत से मिलने के लिए महल कार्यालय गए थे। हमने स्मृति मंदिर कार्यालय में कॉल किया, जहां Vishvas News को पता चला कि तस्वीर में भारत के ऑस्ट्रेलियाई उच्चायुक्त के साथ मौजूद व्यक्ति व्यवस्था प्रमुख, हेडगेवार स्मारक समिति, विकास तेलंग हैं। विश्वास न्यूज से बात करते हुए, विकास तैलंग ने कहा, “वायरल तस्वीर में बैरी ओ’फैरेल के साथ वाला व्यक्ति डॉ. मोहन भागवत नहीं हैं, बल्कि मैं हूँ। हालांकि, डॉ मोहन भागवत के साथ बैरी ओ’फैरेल की मुलाक़ात की तस्वीरें कई जगह देखी जा सकती हैं।

हमने उस प्रोफ़ाइल की सोशल स्कैनिंग की थी, जिसने वायरल तस्वीर को साझा किया था, खाता मेघ अपडेट्स नाम के ट्विटर हैंडल को 2019 में बनाया गया था। इसके 48.83K फ़ॉलोअर हैं।



निष्कर्ष:


भारत दौरे के दौरान ऑस्ट्रेलियाई उच्चायुक्त ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से मुलाकात ज़रूर की थी, मगर विश्वास न्यूज़ ने अपनी जांच में पाया कि वायरल तस्वीर में ऑस्ट्रेलियाई उच्चायुक्त के साथ दिख रहे व्यक्ति मोहन भागवत नहीं, बल्कि विकास तैलंग है।

  • Claim Review : Australian High Commissioner meets RSSorg Chief Dr Mohan Bhagwat and acknowledges the Organisation’s work in #relief
  • Claimed By : Megh Updates Police cars revolving light @MeghUpdates
  • Fact Check : भ्रामक


भ्रामक


    फेक न्यूज की प्रकृति को बताने वाला सिंबल


  • सच


  • भ्रामक


  • झूठ

पूरा सच जानें… किसी सूचना या अफवाह पर संदेह हो तो हमें बताएं

सब को बताएं, सच जानना आपका अधिकार है। अगर आपको ऐसी किसी भी मैसेज या अफवाह पर संदेह है जिसका असर समाज, देश और आप पर हो सकता है तो हमें बताएं। आप हमें नीचे दिए गए किसी भी माध्यम के जरिए जानकारी भेज सकते हैं…

टैग्स



Vishvas News

योग कर रहे एक व्यक्ति का ब्लैक एंड व्हाइट वीडियो सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बताकर शेयर किया जा रहा है. यूज़र्स ये वीडियो शेयर करते हुए कह रहे हैं कि नरेंद्र मोदी की सफ़लता का राज़ योग है. फ़ेसबुक यूज़र नवराज कुमाई मौदगल्य ने ये वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा, “प्रधानमंत्री श्री #नरेंद्र_मोदी जी की 35 साल पुराना एक दुर्लभ योग Video..महात्मा नरेन्द्र दामोदर दास मोदी जी को सफलता की चावी बहुत मेहनत और कडा परिश्रम के बाद मिली है।जय हिंद” आर्टिकल लिखे जाने तक इस वीडियो को 2,700 बार देखा जा चुका है. (पोस्ट का आर्काइव लिंक)

एक और फ़ेसबुक यूज़र ने ये वीडियो एक गुजराती मेसेज के साथ पोस्ट किया है.

ट्विटर हैन्डल ‘@Inv1cta’ ने ऑल्ट न्यूज़ को टैग करते हुए इस वीडियो की हकीकत के बारे में पूछा है.

ट्विटर हैन्डल ‘@ShakunthalaHS’ ने कन्नडा में लिखे मेसेज के साथ ये वीडियो ट्वीट किया. डिलीट किये जाने तक इसे 1,200 बार देखा जा चुका है. (ट्वीट का आर्काइव लिंक) फ़ेसबुक पर ये वीडियो नरेंद्र मोदी का बताकर वायरल है. ऑल्ट न्यूज़ की ऑफ़िशियल एंड्रॉइड ऐप पर इस वीडियो की जांच के लिए कुछ रीक्वेस्ट आई हैं.

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फ़ैक्ट-चेक

वीडियो के फ़्रेम्स गूगल पर रिवर्स इमेज सर्च करने से हमें एक यूट्यूब वीडियो मिला. ये वीडियो 31 मई 2009 को अपलोड किया गया था. इसे बेल्लुर कृष्णमाचार सुन्दरराजा अयंगर और तिरुमलाई कृष्णमाचार्य का बताया गया है. कैप्शन के मुताबिक ये वीडियो साल 1938 का है. गौर करने वाली बात है कि ये वीडियो साल 1938 में शूट किया गया था जबकि नरेंद्र मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 को हुआ था.

आगे, सर्च करने पर 12 मई 2006 को अपलोड किया हुआ एक वीडियो मिला. इस वीडियो में वायरल वीडियो के दृश्य देखने को मिलते हैं. कैप्शन के मुताबिक योग कर रहे व्यक्ति बीकेएस अयंगर हैं. बीकेएस अयंगर प्रतिष्ठित योगगुरु हैं जिन्होंने अयंगर योग नाम की योगशैली के जनक के रूप में जाना जाता है.

वायरल वीडियो के स्क्रीनशॉट और यूट्यूब वीडियो की तुलना करने से वायरल वीडियो में अयंगर ही हैं, ये बात साफ़ हो जाती है.

बीकेएस अयंगर की वेबसाइट पर मौजूद उनकी तस्वीर का मिलान हमने वायरल वीडियो के स्क्रीनशॉट से किया है.

 

तो इस तरह, आधुनिक योग के पिता माने जाने वाले बीकेएस अयंगर के साल 1938 में योग करने का वीडियो नरेंद्र मोदी का बताकर शेयर किया जा रहा है.


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दावा

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के वेरिफाइड हैंडल से किए ट्वीट जैसा एक स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर काफी शेयर किया जा रहा है। इस ट्वीट के मुताबिक, पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने गठबंधन किया है और दोनों साथ मिलकर यह चुनाव लड़ेंगे।

इस ट्वीट में लिखा है, ‘पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए हमने AIMIM से गठबंधन किया है।’ यह स्क्रीनशॉट फेसबुक और ट्विटर दोनों ही प्लेटफॉर्म पर शेयर किया जा रहा है।

संघी, अन्ध्भक्त और कठमुल्ले सब एक हैं । नफ़रत के सौदागर !😡😡😡

Posted by Jahangir Aman Humone on Saturday, November 21, 2020

सच क्या है?

वायरल स्क्रीनशॉट फर्ज़ी है। बीजेपी ने ऐसा कोई ट्वीट नहीं किया जिसमें उसने AIMIM से गठबंधन का ऐलान किया हो।

कैसे की पड़ताल?

जिस ट्वीट का स्क्रीनशॉट शेयर किया जा रहा है वह @bjp4india हैंडल से किया गया है जबकि BJP का आधिकारिक ट्विटर हैंडल ‘@BJP4India’ है।

चूंकि, स्क्रीनशॉट में दिख रहा ट्वीट 20 नवंबर, 2020 को किया गया है इसलिए हमने बीजेपी के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से इस तारीख को किए सारे ट्वीट्स खंगाले लेकिन हमें ऐसा कुछ नहीं मिला जिसमें AIMIM से गठबंधन की बात हो।

इसके अलावा हमें ऐसी कोई विश्वसनीय न्यूज़ रिपोर्ट भी नहीं मिली जिसमें इन दोनों पार्टियों के गठबंधन का ज़िक्र हो। आखिरी बार, बीजेपी ने AIMIM को 2 दिसंबर, 2018 को ट्वीट किया था।

इसके उलट, हमें ऐसी कई न्यूज़ रिपोर्ट मिली जिनके मुताबिक, AIMIM के चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने 2021 चुनावों में बीजेपी को हराने के लिए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को चुनाव पूर्व गठबंधन का प्रस्ताव दिया है। टाइम्स नाऊ ने भी इस खबर को रिपोर्ट किया था।

 

निष्कर्ष

टाइम्स फैक्ट चेक ने पाया है कि AIMIM से गठबंधन की घोषणा वाला वायरल हो रहा बीजेपी के ट्वीट का स्क्रीनशॉट फर्ज़ी है।



Fakeमत – Fakeमत – Page Array – नवभारत टाइम्स

एक ट्विटर यूज़र दीपक शुक्ला ने भाजपा का एक कथित ट्वीट शेयर किया जिसमें दिख रहा है कि भाजपा ने अगले साल होने वाले पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के साथ गठबंधन की घोषणा की है. हाल ही में बिहार विधानसभा चुनाव समाप्त हुए थे जिसमें असदुद्दीन ओवैसी की अगुवाई वाली पार्टी AIMIM ने 5 सीटें जीतीं थी. यूज़र ने इस कथित ट्वीट का स्क्रीनशॉट डालते हुए लिखा, “इत्तेहाद-ऐ-भारतीय जनता मुसलमीन.” (आर्काइव लिंक)

इसे एक फे़सबुक यूज़र ने भी शेयर किया.

एडिट किया हुआ ट्वीट

भाजपा का AIMIM से गठबंधन अपने आप में एक बड़ी ख़बर है. ऐसा होना लगभग नामुमकिन है कि भाजपा AIMIM के साथ गठबंधन करे और मीडिया में ये बहुत बड़ी बात न बने. न ही हमें भाजपा के ऑफ़िशियल ट्विटर हैंडल पर ऐसा कोई ट्वीट मिला न ही इससे जुड़ी कोई मीडिया रिपोर्ट. हमने पोलिट्वूप्स (अधिकतर नामी गिरामी लोगों और ट्विटर हैंडल्स के डिलीट किये हुए ट्वीट्स रखने वाली वेबसाइट) पर भी भाजपा के डिलीट किये गए ट्वीट्स देखे. यहां ऐसा कोई ट्वीट नहीं मिला.

इन सब बातों से पता चलता है कि भाजपा का ये कथित ट्वीट मॉर्फ़ किया हुआ है. हमने नीचे उन हिंट्स के बारे में बताया है जिससे साबित होता है कि ट्वीट का ये स्क्रीनशॉट एडिट किया हुआ है:

– शेयर किये गये ट्वीट में भाजपा के ट्विटर हैंडल का नाम ‘@BJP4india’ लिखा है, जबकि ऑफ़िशियल ट्विटर हैंडल में ‘BJP4India’ है, यानी ‘I’ छोटा नहीं बड़ा है.

– इस ट्वीट में टाइम में ‘P.M.’ लिखा है, जबकि किसी भी ट्विटर पर PM लिखा होता है. P और M के बाद डॉट नहीं लगे होते.

– इस ट्वीट में नीचे लिखा है, ‘Twitter for Web’. अमूमन भाजपा के ऑफ़िशियल ट्विटर हैंडल से किये गए में ट्वीट्स ‘Twitter Web App’ या ‘Twitter media studio’ से किये जाते हैं.

– गौर से देखने पर पता चलता है कि कमेंट के निशान में भी हल्का सा फ़र्क है. इस कथित ट्वीट में कमेंट का निशान की गोलाई कुछ ज़्यादा है.

– इस ट्वीट का टेक्स्ट और अकाउंट की प्रोफ़ाइल पिक्चर एक सीधी रेखा में नहीं हैं, जैसा कि ओरिजिनल ट्वीट्स में होता है.

नीचे एडिट किया गया ट्वीट और BJP4India के एक ओरिजिनल ट्वीट की तुलना करके इन अंतरों को समझाया गया है:

यानी, ये कथित स्क्रीनशॉट एडिट किया गया है. भाजपा ने ऐसा कोई ट्वीट, घोषणा या पार्टी के किसी पदधारी ने ऐसा बयान नहीं दिया जिसमें AIMIM से गठबंधन की बात कही हो.

कुछ दिनों पहले भी सोशल मीडिया पर भाजपा और AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी से सांठ-गांठ का ग़लत दावा वायरल हुआ था. गृहमंत्री अमित शाह और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की साथ में फ़ोटो शेयर करते हुए उसे बंगाल चुनाव से जोड़ा गया था. उससे भी पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल का 2016 का वीडियो वायरल हुआ था जिसे शेयर करते हुए लोगों ने ओवैसी और भाजपा के बीच ‘सीक्रेट डील’ की बात कही थी.


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सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हैदराबाद के कांग्रेस नेता अयूब खान को लेकर एक दावा वायरल हो रहा है। दावा किया जा रहा है कि हैदराबाद के कांग्रेस नेता अयूब खान ने अपनी ही बेटी तरून्नम खान से निकाह कर लिया है।

इस पोस्ट को ट्विटर पर 6500 लोगों द्वारा लाइक किया गया है और 933 यूज़र्स द्वारा रिट्वीट किया गया है।

वायरल पोस्ट के आर्काइव वर्ज़न को यहां और यहां देखा जा सकता है।

देखा जा सकता है कि इस दावे को ट्विटर पर अलग-अलग यूज़र्स द्वारा शेयर किया जा रहा है।

देखा जा सकता है कि इस दावे को फेसबुक पर भी कई यूज़र्स द्वारा शेयर किया जा रहा है।

अयूब खान ने नहीं किया तरून्नम खान के साथ निकाह, फर्ज़ी दावा वायरल

Fact Checking/Verification

कांग्रेस नेता अयूब खान को लेकर किए जा रहे दावे की सत्यता जानने के लिए हमने पड़ताल शुरु की। Google Keywords Search की मदद से खंगालने पर हमें वायरल दावे से संबंधित कोई मीडिया रिपोर्ट्स नहीं मिली।

अयूब खान ने नहीं किया तरून्नम खान के साथ निकाह, फर्ज़ी दावा वायरल

तरून्नम खान को लेकर किए गए दावे की पड़ताल जारी रखते हुए हमने फेसबुक खंगालना शुरु किया। पड़ताल के दौरान हमें एक फेसबुक पोस्ट मिली और इस पोस्ट को शेयर करते हुए एक स्क्रीनशॉट शेयर किया गया है।

फेसबुक पोस्ट के साथ Tarunnum Khan की फेसबुक पोस्ट का स्क्रीनशॉट शेयर किया गया है। जिसमें वो व्हाईट कलर की ड्रेस पहनी हुई नज़र आ रही है। इन तस्वीरों को शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा है, “ Got Married with my Dad Ayub Khan. I am nervous, I don’t have marriage experience”.

हिंदी अनुवाद- मेरे डैड अयूब खान के साथ मेरी शादी हुई है। मैं घबरायी हुई हूं और मुझे शादी का बिल्कुल भी अनुभव नहीं है”।

अब हमने फेसबुक पर Tarunnum Khan की प्रोफाइल को खंगाला और पाया की यह सोशल मीडिया इंन्फ्लुएन्सपर हैं और मुंबई में रहती हैं। फेसबुक प्रोफाइल को खंगालते हुए हमारे हाथ एक पोस्ट लगी जिसको नीचे देखा जा सकता है। यह पोस्ट 28 सितंबर 2020 को तरून्नम के अकाउंट से शेयर की गई थी। Tarunnam Khan ने व्हाइट फैरी ड्रेस पहनते हुए कुछ तस्वीरें शेयर की गई है। लेकिन इस पोस्ट को शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा है, “White Attire” यानि “सफेद ड्रैस”।

https://www.facebook.com/photo/?fbid=1719247411559199&set=a.511616102322342

अयूब खान ने नहीं किया तरून्नम खान के साथ निकाह, फर्ज़ी दावा वायरल

तरून्नम की फेसबुक प्रोफाइल को आगे स्कॉल करने पर हमें 8 नवंबर, 2020 की एक पोस्ट मिली।

पोस्ट को शेयर करते हुए तरुन्नम ने कहा, “अब मेरे इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक नज़र डालें, सभी फर्ज़ी चीज़ों को हटा दिया गया है। अब यह एक आधिकारिक अकाउंट बन गया है।    

इंस्टाग्राम पर हमने तरून्नम खान के अकाउंट को भी खंगाला। पड़ताल के दौरान हमें वहां वायरल दावे से संबंधित कोई पोस्ट नहीं मिली।

https://www.instagram.com/tarunnamkhan49/

अधिक जानकारी के लिए हमनेGoogle Reverse Image Search का सहारा लिया। पड़ताल के दौरान हमारे हाथ YouTube पर Style World नामक चैनल पर 2 दिसंबर, 2018 को अपलोड की गई एक वीडियो मिली।

इस वीडियो में एक हेयर स्टाइलिस्ट को तरून्नम खान का हेयर स्टाइल बनाते हुए देखा जा सकता है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरें भी इसी वीडियो से ली गई हैं। यह वीडियो दो साल पुरानी है।

अधिक जानकारी के लिए हमने Tarunnam Khan के YouTube चैनल को खंगाला। पड़ताल के दौरान हमें एक वीडियो मिली जिसमें वो लोगों से पीएम मोदी को वोट देने का अनुरोध कर रही हैं।

Tarunnam Khan के YouTube चैनल पर हमें कुछ ऐसी वीडियोज़ मिली जिनका कुछ मतलब नहीं बन रहा था। नीचे देखा जा सकता है कि इन वीडियोज़ में तरून्नम अकेली ही खड़ी हैं और वीडियो के टाइटल में अयूब खान का नाम लिखा हुआ है।

तरून्नम ने अकाश अंबानी, अमिताभ बच्चन, मुफ्ती मेंक और विराट कोहली जैसे फेमस लोगों के नामों पर वीडियो बनाई है। इन सभी वीडियोज़ में तरन्नुम कह रही हैं कि वो इन सभी फेमस लोगों को डेट कर रही हैं।  

Conclusion

सोशल मीडिया पर वायरल हो रही वीडियो का बारीकी से अध्ययन करने पर हमने पाया कि अयूब खान और तरून्नम खान को लेकर किया जा रहा दावा फर्ज़ी है। पड़ताल में हमने पाया कि तरून्नम खान एक सोशल मीडिया इन्फ़्लुएंसर हैं जो मनोरंजन वाले वीडियोज़ बनाती हैं। पड़ताल के दौरान हमें ऐसी कोई मीडिया रिपोर्ट भी नहीं मिली जिससे यह साबित होता हो कि अयूब खान ने बेटी तरून्नम से निकाह किया है। हम तरून्नम खान से संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं जैसे हमें वायरल दावे से संबंधित कोई जानकारी मिलती है तो इस आर्टिकल को अपडेट कर दिया जाएगा।


Result: False


Our Sources

Facebook https://www.facebook.com/profile.php?id=100004218706363

Instagram https://www.instagram.com/tarunnamkhan49/

YouTube https://www.youtube.com/watch?v=R1ZndF05ZrI

YouTube https://www.youtube.com/watch?v=WJu0cPu-Bhw


किसी संदिग्ध ख़बर की पड़ताल, संशोधन या अन्य सुझावों के लिए हमें WhatsApp करें: 9999499044  या ई-मेल करें: [email protected]



NC Hindi

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हैदराबाद के कांग्रेस नेता अयूब खान को लेकर एक दावा वायरल हो रहा है। दावा किया जा रहा है कि हैदराबाद के कांग्रेस नेता अयूब खान ने अपनी ही बेटी तरून्नम खान से निकाह कर लिया है।

इस पोस्ट को ट्विटर पर 6500 लोगों द्वारा लाइक किया गया है और 933 यूज़र्स द्वारा रिट्वीट किया गया है।

वायरल पोस्ट के आर्काइव वर्ज़न को यहां और यहां देखा जा सकता है।

देखा जा सकता है कि इस दावे को ट्विटर पर अलग-अलग यूज़र्स द्वारा शेयर किया जा रहा है।

देखा जा सकता है कि इस दावे को फेसबुक पर भी कई यूज़र्स द्वारा शेयर किया जा रहा है।

अयूब खान ने नहीं किया तरून्नम खान के साथ निकाह, फर्ज़ी दावा वायरल

Fact Checking/Verification

कांग्रेस नेता अयूब खान को लेकर किए जा रहे दावे की सत्यता जानने के लिए हमने पड़ताल शुरु की। Google Keywords Search की मदद से खंगालने पर हमें वायरल दावे से संबंधित कोई मीडिया रिपोर्ट्स नहीं मिली।

अयूब खान ने नहीं किया तरून्नम खान के साथ निकाह, फर्ज़ी दावा वायरल

तरून्नम खान को लेकर किए गए दावे की पड़ताल जारी रखते हुए हमने फेसबुक खंगालना शुरु किया। पड़ताल के दौरान हमें एक फेसबुक पोस्ट मिली और इस पोस्ट को शेयर करते हुए एक स्क्रीनशॉट शेयर किया गया है।

फेसबुक पोस्ट के साथ Tarunnum Khan की फेसबुक पोस्ट का स्क्रीनशॉट शेयर किया गया है। जिसमें वो व्हाईट कलर की ड्रेस पहनी हुई नज़र आ रही है। इन तस्वीरों को शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा है, “ Got Married with my Dad Ayub Khan. I am nervous, I don’t have marriage experience”.

हिंदी अनुवाद- मेरे डैड अयूब खान के साथ मेरी शादी हुई है। मैं घबरायी हुई हूं और मुझे शादी का बिल्कुल भी अनुभव नहीं है”।

अब हमने फेसबुक पर Tarunnum Khan की प्रोफाइल को खंगाला और पाया की यह सोशल मीडिया इंन्फ्लुएन्सपर हैं और मुंबई में रहती हैं। फेसबुक प्रोफाइल को खंगालते हुए हमारे हाथ एक पोस्ट लगी जिसको नीचे देखा जा सकता है। यह पोस्ट 28 सितंबर 2020 को तरून्नम के अकाउंट से शेयर की गई थी। Tarunnam Khan ने व्हाइट फैरी ड्रेस पहनते हुए कुछ तस्वीरें शेयर की गई है। लेकिन इस पोस्ट को शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा है, “White Attire” यानि “सफेद ड्रैस”।

https://www.facebook.com/photo/?fbid=1719247411559199&set=a.511616102322342

अयूब खान ने नहीं किया तरून्नम खान के साथ निकाह, फर्ज़ी दावा वायरल

तरून्नम की फेसबुक प्रोफाइल को आगे स्कॉल करने पर हमें 8 नवंबर, 2020 की एक पोस्ट मिली।

पोस्ट को शेयर करते हुए तरुन्नम ने कहा, “अब मेरे इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक नज़र डालें, सभी फर्ज़ी चीज़ों को हटा दिया गया है। अब यह एक आधिकारिक अकाउंट बन गया है।    

इंस्टाग्राम पर हमने तरून्नम खान के अकाउंट को भी खंगाला। पड़ताल के दौरान हमें वहां वायरल दावे से संबंधित कोई पोस्ट नहीं मिली।

https://www.instagram.com/tarunnamkhan49/

अधिक जानकारी के लिए हमनेGoogle Reverse Image Search का सहारा लिया। पड़ताल के दौरान हमारे हाथ YouTube पर Style World नामक चैनल पर 2 दिसंबर, 2018 को अपलोड की गई एक वीडियो मिली।

इस वीडियो में एक हेयर स्टाइलिस्ट को तरून्नम खान का हेयर स्टाइल बनाते हुए देखा जा सकता है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरें भी इसी वीडियो से ली गई हैं। यह वीडियो दो साल पुरानी है।

अधिक जानकारी के लिए हमने Tarunnam Khan के YouTube चैनल को खंगाला। पड़ताल के दौरान हमें एक वीडियो मिली जिसमें वो लोगों से पीएम मोदी को वोट देने का अनुरोध कर रही हैं।

Tarunnam Khan के YouTube चैनल पर हमें कुछ ऐसी वीडियोज़ मिली जिनका कुछ मतलब नहीं बन रहा था। नीचे देखा जा सकता है कि इन वीडियोज़ में तरून्नम अकेली ही खड़ी हैं और वीडियो के टाइटल में अयूब खान का नाम लिखा हुआ है।

तरून्नम ने अकाश अंबानी, अमिताभ बच्चन, मुफ्ती मेंक और विराट कोहली जैसे फेमस लोगों के नामों पर वीडियो बनाई है। इन सभी वीडियोज़ में तरन्नुम कह रही हैं कि वो इन सभी फेमस लोगों को डेट कर रही हैं।  

Conclusion

सोशल मीडिया पर वायरल हो रही वीडियो का बारीकी से अध्ययन करने पर हमने पाया कि अयूब खान और तरून्नम खान को लेकर किया जा रहा दावा फर्ज़ी है। पड़ताल में हमने पाया कि तरून्नम खान एक सोशल मीडिया इन्फ़्लुएंसर हैं जो मनोरंजन वाले वीडियोज़ बनाती हैं। पड़ताल के दौरान हमें ऐसी कोई मीडिया रिपोर्ट भी नहीं मिली जिससे यह साबित होता हो कि अयूब खान ने बेटी तरून्नम से निकाह किया है। हम तरून्नम खान से संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं जैसे हमें वायरल दावे से संबंधित कोई जानकारी मिलती है तो इस आर्टिकल को अपडेट कर दिया जाएगा।


Result: False


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किसी संदिग्ध ख़बर की पड़ताल, संशोधन या अन्य सुझावों के लिए हमें WhatsApp करें: 9999499044  या ई-मेल करें: [email protected]



NC Hindi

  • By Vishvas News
  • Updated: November 24, 2020


नई दिल्‍ली (Vishvas News)। पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में अभी भले ही वक्‍त हो, लेकिन सोशल मीडिया में इस चुनाव से जुडी फर्जी खबरें वायरल होना शुरू हो चुकी हैं। फेसबुक पर कुछ यूजर्स भाजपा के नाम से एक फेक ट्वीट को यह कहते हुए वायरल कर रहे हैं कि पश्चिम बंगाल के आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा AIMIM के साथ गठबंधन करेगी।

विश्‍वास न्‍यूज ने वायरल पोस्‍ट की जांच की। हमारी पड़ताल में पता चला कि यह ट्वीट पूरी तरह फेक है। भाजपा ने ऐसा कोई भी ट्वीट नहीं किया है।

क्‍या हो रहा है वायरल

फेसबुक यूजर अनिल शर्मा ने 21 नवंबर को फेक ट्वीट को पोस्‍ट करते हुए लिखा: “जीतने के लिए किसी भी हद तक जाना पड़ेगा जरूर जाएंगे, पहले उन्हीं को लड़ाइयेगे फिर उन्हीं को आपस मे लाडवा देंगे, कोई रोजगार की तरफ ध्यान बिलकुल नहीं देगा.”

भाजपा के नाम से किए गए ट्वीट में लिखा गया : “We have formed alliance with AIMIM in upcoming WB elections.”

फेसबुक पोस्‍ट का आर्काइव्‍ड वर्जन यहां देखा जा सकता है।

पड़ताल

विश्‍वास न्‍यूज ने सबसे पहले वायरल हो रहे दावे की सच्‍चाई जानने के लिए गूगल में ‘ओवैसी और भाजपा का गठबंधन’ जैसे कीवर्ड टाइप करके खबरों को सर्च करना शुरू किया। हमें असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआइएमआइएम का भाजपा के साथ किसी भी प्रकार के गठबंधन से जुड़ी कोई खबर नहीं मिली, जबकि खबरों से यह जरूर पता चला कि असदुद्दीन ओवैसी ने ममता बनर्जी के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की पेशकश की थी।

जागरण डॉट कॉम पर 19 नवंबर को पब्लिश खबर में बताया गया कि ओवैसी ने ममता के साथ चुनाव पूर्व गठबंधन की पेशकश करते हुए कहा कि उनकी पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा को हराने में तृणमूल कांग्रेस की मदद करेगी। पूरी खबर यहां पढ़ सकते हैं।

पड़ताल के अगले चरण में हमने भाजपा के आधिकारिक ट्विटर हैंडल BJP4India को स्‍कैन करना शुरू किया। हमें पता चला कि वायरल ट्वीट जैसा कोई भी ट्वीट इस हैंडल से नहीं किया गया। 20 नवंबर को ही हमें भाजपा के ट्विटर हैंडल पर वह ट्वीट जरूर मिला, जिसमें भाजपा अध्‍यक्ष जेपी नडडा ओवेसी की पार्टी को समाज तोड़ने वाला बता रहे हैं। यह ट्वीट आप यहां देख सकते हैं।

विश्‍वास न्‍यूज ने फेक ट्वीट को लेकर भाजपा के प्रवक्‍ता तजिंदर पाल सिंह बग्‍गा से संपर्क किया। उन्‍होंने बताया कि वायरल ट्वीट में कोई सच्‍चाई नहीं है।

अंत में हमने फर्जी पोस्‍ट करने वाले यूजर की जांच की। हमें पता चला कि यूजर अनिल शर्मा नई दिल्‍ली में रहते हैं।



निष्कर्ष:


विश्‍वास न्‍यूज की पड़ताल में भाजपा के नाम से वायरल ट्वीट फर्जी निकला। भाजपा के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से इस तरह का कोई ट्वीट नहीं किया गया।

  • Claim Review : दावा किया गया कि बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा AIMIM से गठबंधन करेगी।
  • Claimed By : फेसबुक यूजर अनिल शर्मा
  • Fact Check : झूठ


झूठ


    फेक न्यूज की प्रकृति को बताने वाला सिंबल


  • सच


  • भ्रामक


  • झूठ

पूरा सच जानें… किसी सूचना या अफवाह पर संदेह हो तो हमें बताएं

सब को बताएं, सच जानना आपका अधिकार है। अगर आपको ऐसी किसी भी मैसेज या अफवाह पर संदेह है जिसका असर समाज, देश और आप पर हो सकता है तो हमें बताएं। आप हमें नीचे दिए गए किसी भी माध्यम के जरिए जानकारी भेज सकते हैं…

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Vishvas News

  • By Vishvas News
  • Updated: November 24, 2020


नई दिल्ली (विश्वास टीम)। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल हो रही है, जिसके जरिए दावा किया जा रहा है कि उत्तरप्रदेश के बरेली में 30 दिनों के लिए पुलिस का मास्क चेकिंग अभियान शुरू किया गया है। चालान से बचने के लिए मास्क पहन कर निकलें। विश्वास न्यूज ने पड़ताल में पाया कि पुलिस ने बरेली में 30 दिनों के लिए मास्क चेकिंग का कोई अभियान शुरू नहीं किया है। लिहाजा वायरल पोस्ट फर्जी है।

क्या है वायरल पोस्ट में?

फेसबुक पेज Bareilly The City of Love पर यह पोस्ट शेयर किया गया है, जिसमें लिखा है— आवश्यक सूचना कल से बरेली मै प्रात: 9 बजे से पुलिस का मास्क चैकिंग का 30 दिन का अभियान चलेगा सभी भाई मास्क का प्रयोग करके चालान की कार्यवाही से बचें। यह पोस्ट 20 नवंबर की है, लिहाजा इसके जरिए यूजर यह अभियान 21 नवंबर से शुरू होने का दावा कर रहा है।

पोस्ट का आर्काइव्ड वर्जन यहां देखा जा सकता है।

विश्वास न्यूज को वॉट्सऐप चैटबॉट नंबर 9599299372 पर भी इस पोस्ट को फैक्ट चेक करने की रिक्वेस्ट मिली।

पड़ताल

वायरल पोस्ट में किए जा रहे दावे की पड़ताल के लिए हमने सबसे पहले इंटरनेट पर कीवर्ड्स की मदद से सर्च किया। हमें ऐसा ही मैसेज बिना किसी शहर के नाम से भी कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर शेयर किया हुआ मिला। हालांकि, हमें बरेली में इस तरह के अभियान से संबंधित कोई मीडिया रिपोर्ट या उत्तरप्रदेश पुलिस की ओर से जारी कोई आधिकारिक आदेश नहीं मिला।

वायरल पोस्ट का सच जानने के लिए हमने बरेली एसपी रोहित सिंह सजवान से संपर्क किया। सिंह ने बताया कि वायरल हो रहे मैसेज में कही गई बात सच नहीं है। बरेली में इस तरह का कोई अभियान नहीं चलाया गया है। बेशक नॉर्मल जांच जारी है, लेकिन मास्क संबंधी इस तरह का कोई अभियान नहीं चलाया जा रहा है।

फेसबुक पर यह पोस्ट Bareilly The City of Love नामक पेज पर शेयर की गई है। पेज की प्रोफाइल को स्कैन करने पर हमने पाया कि इस पेज को खबर लिखे जाने तक 6676 लोग फॉलो कर रहे थे।



निष्कर्ष:


बरेली में 30 दिनों के लिए पुलिस ने मास्क चेकिंग अभियान शुरू नहीं किया है, वायरल पोस्ट में किया जा रहा दावा गलत है।

  • Claim Review : बरेली में पुलिस का मास्क चैकिंग का 30 दिन का अभियान शुरू हो गया है
  • Claimed By : Fb Page: Bareilly The City of Love
  • Fact Check : झूठ


झूठ


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Vishvas News

  • By Vishvas News
  • Updated: November 24, 2020


नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट फिर से वायरल हो रही है। इस पोस्ट में किसी किताब का एक पेज दिखाया जा रहा है। कैप्शन में दावा किया जा रहा है कि 12वीं क्लास की किताब में कोविड-19 का इलाज मौजूद है और वायरस नया नहीं है। विश्वास न्यूज की पड़ताल में ये दावा भ्रामक पाया गया है। कोविड-19 कोरोना वायरस परिवार का नया वायरस है। इसकी वैक्सीन के लिए क्लिनिकल ट्रायल अब भी जारी है।

क्या हो रहा है वायरल

विश्वास न्यूज को फैक्ट चेकिंग वॉट्सऐप चैटबॉट (+91 95992 99372) पर ये दावा फैक्ट चेक के लिए मिला है। इस पोस्ट में लिखा है, ‘भाइयों काफी किताबों में ढूंढने के बाद बड़ी मुश्किल से कोरोना वायरस की दवा मिली है, हम लोग कोरोना वायरस की दवा ना जाने कहां-कहां ढूंढते रहे, लेकिन कोरोना वायरस की दवा इंटरमीडिएट की जन्तु विज्ञान की किताब में दी गई है, जिस वैज्ञानिक ने इस बीमारी के बारे में लिखा है उसने ही इसके इलाज के बारे में भी लिखा है और यह कोई नई बीमारी नहीं है इसके बारे में तो पहले से ही इंटरमीडिएट की किताब में बताया गया है साथ में इलाज भी। कभी-कभी ऐसा होता है कि डॉक्टर और वैज्ञानिक बड़ी-बड़ी किताबों के चक्कर में छोटे लेवल की किताबों पर ध्यान नहीं देते और यहां ऐसा ही हुआ है। (किताब- जन्तु विज्ञान, लेखक- डॉ रमेश गुप्ता, पेज नं-1072) भाइयों यह कोई फेक न्यूज़ नहीं है इसलिए मेरी आप से यह विनती है कि इस दवा को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें, ताकि किसी कोरोना वायरस से ग्रसित मरीज का इलाज हो सके।’

पड़ताल

इस पोस्ट में कई दावे किए गए हैं। विश्वास न्यूज ने एक-एक कर उन दावों की पड़ताल की:

दावा: डॉ. रमेश गुप्ता द्वारा लिखी गई इस किताब में कोरोना वायरस की डिटेल्स का उल्लेख है।

विश्वास न्यूज ने डॉ. रमेश गुप्ता के पुराने सहयोगी डॉ. वी के द्विवेदी से बात की। हमें उनसे पता चला कि डॉ. गुप्ता अब जिंदा नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी किताब में कोरोना वायरस परिवार की डिटेल्स मौजूद हैं। इसमें नोवल कोरोना वायरस (COVID-19) के बारे में नहीं बताया गया है।

विश्वास न्यूज पहले भी इस दावे की पड़ताल कर चुका है। उस फैक्ट चेक स्टोरी को नीचे विस्तार से पढ़ा जा सकता है।



निष्कर्ष:


पुरानी किताब में कोविड-19 और इसके इलाज के जिक्र होने का दावा भ्रामक है। पोस्ट एक बार फिर सोशल मीडिया पर शेयर की जा रही है।

  • Claim Review : दावा किया जा रहा है कि 12वीं क्लास की किताब में कोविड-19 का इलाज मौजूद है और वायरस नया नहीं है।
  • Claimed By : वॉट्सऐप यूजर
  • Fact Check : भ्रामक


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टैग्स

Vishvas News

कई फे़सबुक यूज़र्स एक वीडियो शेयर कर रहे हैं जिसमें एक व्यक्ति जेल के अंदर दिख रहा है. ये वीडियो 1 मिनट 39 सेकंड का है. वीडियो देख कर मालूम पड़ता है ये काफ़ी पुराना है. बैकग्राउंड में चल रहे वॉइस ओवर में कैदी के अनुभवों के बारे में बताया जा रहा है. लोगों ने दावा किया कि ये कथित दुर्लभ फु़टेज विनायक दामोदर सावरकर की है जिसे एक ब्रिटिश पत्रकार ने जेल में जाकर रिकॉर्ड किया था.

 

एक ब्रिटिश पत्रकार ने अंडमान की जेल में जाकर ‘वीर सावरकर’ का यह दुर्लभ फुटेज बनाया था ।

बीबीसी ने भी अपने चैनल पर यह दिखाया था… जिसमें एक छोटी-सी कोठरी में वीर सावरकर कैद थे।

ये सब यातनाएं वीर सावरकर ने देश की आज़ादी के लिय। वीर सावरकर को नमन🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

Posted by कुमार मुकेश on Saturday, November 21, 2020

हमने पाया कि ये वीडियो पहले भी (पोस्ट 1,पोस्ट  2, पोस्ट 3) शेयर किया जा चुका है.

ऑल्ट न्यूज़ को इसके फै़क्ट चेक के लिए व्हाट्सऐप (+917600011160) और ऑफ़िशियल एंड्रॉइड ऐप पर रिक्वेस्ट भी भेजी गयीं.

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सावरकर पर बनी फ़िल्म की क्लिप

हमने जब यूट्यूब पर कीवर्ड ‘savarkar andaman jail’ सर्च किया तो सबसे पहले सजेशन में ही दी लल्लनटॉप का इसपर मार्च, 2020 में किया गया फै़क्ट चेक वीडियो मिला. इस फै़क्ट चेक में बताया गया है कि वायरल वीडियो असल में एक फ़िल्म से निकाली गयी क्लिप है. सजेशंस को और नीचे स्क्रॉल करने पर हमें सूचना एवं प्रसारण मंत्रायल के ऑफ़िशियल चैनल पर अपलोड की गयी 40 मिनट 59 सेकंड की फ़िल्म मिली जिसका टाइटल है- ‘लाइफ़ ऑफ़ श्री विनायक दामोदर सावरकर.’ इसे 14 अगस्त, 2014 को अपलोड किया गया था.

वीडियो में 1 मिनट 45 सेकंड पर फ़िल्म शुरू होती है, जिसका नाम है, “वीर सावरकर.” वीडियो के डिस्क्रिप्शन में लिखा है कि इसमें उनके (सावरकर के) जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं को दिखाया गया है. ओरिजिनल वीडियो में 25 मिनट से 30 मिनट में जो विज़ुअल्स हैं, वायरल वीडियो में उसी का हिस्सा दिखता है. यानी, इस हिस्से की कई क्लिप्स को निकाल कर किसी ने ये वायरल वीडियो बनाया है.

नीचे फ़िल्म्स डिवीज़न का वॉटरमार्क भी वीडियो में दिख रहा है. इसके अलावा, ओरिजिनल वीडियो में हिंदी कैप्शन नहीं दिए गये हैं जो वायरल वीडियो में हैं.

वीडियो पर फ़िल्म्स डिवीज़न का वॉटरमार्क है और साथ ही 1 मिनट 28 सेकंड पर इसका श्रेय फिल्म्स डिवीज़न को ही दिया हुआ है.
हमने फ़िल्म्स डिवीज़न पर जब ‘Veer Savarkar’ ढूंढा तो फ़िल्म के बारे में और ज़्यादा जानकारी मिली जिसके अनुसार सावरकर पर बनी फिल्म के 3 वर्ज़न मौजूद हैं. इन सभी वर्ज़न में बताया गया है कि ये 1983 में बनी फिल्म है जिसे प्रेम वैद्य ने डायरेक्ट किया था.

कुल मिलाकर इस फै़क्ट-चेक में हमें 2 दावों की सच्चाई पता चलती है:
1. वीडियो में वीर सावरकर खुद नहीं हैं. उनका किरदार एक अभिनेता ने निभाया था.
2. इस वीडियो को किसी ब्रिटिश पत्रकार ने नहीं शूट किया है. ये एक फ़िल्म का हिस्सा है जिसे प्रेम वैद्य ने डायरेक्ट किया था.


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सोशल मीडिया पर मंदिर का एक वीडियो वायरल है जिसमें एक मूर्ति पर बारिश होते हुए दिख रही है. दावा है कि सिर्फ़ नटराज की मूर्ति पर ही बारिश हो रही है, बाकी जगहों पर नहीं. वायरल वीडियो में भी नटराज की मूर्ति के अलावा आस-पास की मूर्ति पर बारिश होते हुए नहीं दिख रही है. ट्विटर यूज़र लॉस्ट टेम्पल्स ने वीडियो को चमत्कार बताते हुए ट्वीट किया. आर्टिकल लिखे जाने तक इस वीडियो को 69 हज़ार बार देखा जा चुका है. (ट्वीट का आर्काइव लिंक)

एक और ट्विटर यूज़र ने ये वीडियो इसी दावे के साथ ट्वीट किया है. ट्वीट में इस वीडियो को तमिलनाडु के चिदंबरम स्थित तिलाई नटराज मंदिर का बताया गया है.(ट्वीट का आर्काइव लिंक)

फ़ेसबुक और ट्विटर पर ये वीडियो वायरल है. इसके अलावा, तमिल तिसाई नामक एक वेबसाइट ने इस वीडियो को चमत्कारिक घटना बताते हुए आर्टिकल पब्लिश किया है.

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फ़ैक्ट-चेक

वीडियो में इसलिए सिर्फ़ नटराज की मूर्ति पर ही बारिश होते हुए दिख रही है क्योंकि वहां बाकी जगहों की बनिस्बत रोशनी ज़्यादा है. अंधरे के वक़्त बारिश की बूंदे ऐसी जगहों पर ही दिखती हैं जहां पीछे रोशनी का कोई सोर्स मौजूद हो.

वायरल वीडियो में ज़ोरदार बारिश की आवाज़ सुनाई देती है. इसके अलावा, वीडियो में दूसरी 2 मूर्तियों के लाइट स्टैन्ड्स पर से बूंदें नीचे गिरती हुए दिखती हैं.

इसका मतलब है कि बारिश पूरे मंदिर पर हुई है न कि सिर्फ़ नटराज की मूर्ति पर. ये बात नीचे के वीडियो से साफ़ हो जाती है.

 

आगे, यूट्यूब पर की-वर्ड्स सर्च करने से हमें 19 नवंबर 2020 का एक वीडियो मिला. ये वीडियो चिदंबरम के तिलाई नटराज मंदिर में हुई बारिश का है. इस वीडियो में 1 मिनट 45 सेकंड के बाद दिखने वाली क्लिप में मंदिर के आंगन में भी बारिश होते हुए दिख रही है. आंगन का फ़र्श पूरी तरह गीला है और साथ में पानी गिरने की आवाज़ भी सुनाई देती है.

फ़ेसबुक पेज ‘Thiruvallur News’ ने सिर्फ़ नटराज की मूर्ति पर बारिश होने के दावे को ग़लत बताते हुए मंदिर के आंगन में हो रही बारिश का वीडियो पोस्ट किया है.

Nataraja temple raining fake news | Real or Fake? | நடராஜர் சிலைக்கு மட்டும் மழை பெய்தது உண்மையா ?

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நடராஜர் சிற்பத்திற்கு மட்டும் மழை பெய்யும் அதிசய நிகழ்வு!!!

சிதம்பரம் நடராஜர் ஆலயத்தில் கிழக்கு கோபுர வாசல் முன்னாடி உள்ள சிவபெருமானுக்கு மட்டும் வானத்திலிருந்து பூ மழை தூவும் காட்சி கண்கொள்ளாக் காட்சி கண்டு களியுங்கள்

தில்லை நடராஜர் ஆலயத்தில் நடராஜர் திருமேனிக்கு மட்டும் மழை பொழிந்த அதிசய காட்சி | சிதம்பரம் நடராஜர் திருமேனியில் மட்டும் மழை பெய்யும் அதிசியம் | சிதம்பரம் கீழவீதி முகப்பில் இருக்கும் நடராஜ திருமேனிக்கு மட்டும் மழை பொழியும் அதிசயம் | சிதம்பரம் | நடராஜர் | மழை பெய்யும் அதிசியம் | koil | temple | miracle | kovil | கோவில் | கோயில் | sivan | shivan | ஈசன் | chidambaram | natarajar | சிவன் | chidambaram temple | chidambaram natarajar temple | சிதம்பர ரகசியம் | சிதம்பரம் கோவில் | சிதம்பரம் நடராஜர் கோயில் வரலாறு | சிதம்பரம் நடராஜர் கோயில் | சிதம்பரம் கோவில் வரலாறு | சிதம்பரம் நடராஜர் அபிஷேகம் | சிதம்பரம் நடராஜர் பாடல் | சிதம்பரம் நடராஜர் ஆருத்ரா தரிசனம் | தில்லை நடராஜர் | தில்லை நடராஜர் கோயில் | தில்லை நடராஜர் பாடல் | thillai nataraja | thillai natarajar | #சிதம்பரம் #நடராஜர் #சிவன் #natarajar #chidambaram | சிதம்பரம் நடராஜர் கோயிலில் அதிசய நிகழ்வு – சுவாமி சிலையில் மழை பெய்யும் காட்சி | Chidambaram | Chidambaram Natrajar Temple Rain | Chidambaram Natrajar Temple | சிதம்பரம் நடராஜர் கோவில் | நடராஜர் கோவில் | நடராஜர் கோயில் | தில்லை நடராஜர் | தில்லை நடராஜர் கோவில் | சிதம்பரம் நடராஜர் சிலை மீது மட்டும் மழை பெய்வது போன்ற வீடியோ | சிதம்பரம் நடராஜர் கோயிலில் அதிசய நிகழ்வு – சுவாமி சிலையில் மழை பெய்யும் காட்சி | Chidambaram | நடராஜர் சிற்பத்திற்கு மட்டும் மழை பெய்யும் அதிசய நிகழ்வு!!!
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Posted by Thiruvallur News on Thursday, 19 November 2020

इसके अलावा इस बात को बेहतर समझने के लिए कि वहां रौशनी अधिक होने की वजह से बारिश की बूंदें साफ़ दिख रही थीं, नीचे दिया गया ये वीडियो देखिये.

कुल मिलाकर, रात के वक़्त लाइटिंग के कारण सिर्फ़ नटराज की मूर्ति पर ही बारिश होते हुए दिख रही है लेकिन असल में पूरे इलाके में बारिश हो रही थी. ये वीडियो ‘चमत्कारिक रूप से सिर्फ़ नटराज की मूर्ती पर ही बारिश होने’ के झूठे दावे से शेयर किया गया.


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सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर हो रहा है जिसमें रेलवे स्टेशन पर इंतज़ार करते हुए लोगों की भीड़ दिखती है. इस वीडियो को हाल का बताया जा रहा है. गोपी शाह नाम के एक यूज़र ने इसे शेयर करते हुए लिखा है, “कोरोना की ऐसी की तैसी.”

और भी कुछ लोग इसे शेयर कर रहे हैं.

फ़ैक्ट-चेक

ऑल्ट न्यूज़ ने इस वीडियो की पड़ताल 2 साल पहले की थी जब इसे शेयर करते हुए ग़लत दावा किया जा रहा था कि ये गुजरात में रहने वाले प्रवासी हैं जो राज्य छोड़कर जा रहे हैं.

ऑल्ट न्यूज़ ने InVID की मदद से वीडियो के एक फ़्रेम का गूगल रिवर्स इमेज सर्च किया तो 23 सितम्बर, 2018 को यूट्यूब पर अपलोड किया हुआ ये वीडियो मिला. इसका कैप्शन था, “कृष्णानगर बोंगाव लोकल ट्रेन – रानाघाट.” इससे हमें पता चला कि ये वीडियो पश्चिम बंगाल के कृष्णनगर बोंगाव के रानाघाट स्टेशन का है. वीडियो में लोगों को बंगाली बोलते सुना जा सकता है.

इसके अलावा ऑल्ट न्यूज ने जब ‘Ranaghat station’ कीवर्ड से फ़ेसबुक पर सर्च किया तो पता चला कि सुमंत कुमार नाथ को क्रेडिट देते हुए इस वीडियो को एक यूज़र ने 23 सितंबर 2018 को पोस्ट किया था.

ऑल्ट न्यूज ने सुमंत कुमार से बात की तो उन्होंने बताया, “मैंने कांस्टेबल पद की परीक्षा के दिन स्टेशन पर छात्रों की भीड़ देखकर सुबह 8 बजकर 30 मिनट पर ये वीडियो शूट किया था.” इसके अलावा, सुमंत ने हमें 10 अक्टूबर, 2018 को उसी जगह से एक और वीडियो बनाकर भेजा.

 

हमें पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा जारी एक नोटिस मिला जिसमें इस परीक्षा का ज़िक्र है. इससे सुमंत की बताई बात साबित होती है कि 23 सितंबर 2018 को कॉन्स्टेबल पद की परीक्षा थी.

इस तरह पश्चिम बंगाल का 2 साल पुराना वीडियो हाल का बताकर शेयर किया जा रहा है.

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Claim

Big breaking Kanpur encounter मामले में UP पुलिस के लिए बड़ी कामयाबी की ख़बर आ रही है। औरैया में इंस्पेक्टर ऋषि कान्त ने विकास दुबे को मुठभेड़ मे मार गिराया-सूत्र

जानिए वायरल दावा

सोशल मीडिया पर एक WhatsApp सन्देश तेजी से फॉरवर्ड हो रहा है। जहां ब्रेकिंग न्यूज़ शीर्षक के साथ एक खबर को शेयर किया जा रहा है। खबर में लिखा है कि कानपुर में 8 पुलिस कर्मियों की हत्या के आरोपी कुख्यात हिस्ट्रीशीटर, विकास दुबे को औरैया में पुलिस के साथ हुई एक मुठभेड़ में इंस्पेक्टर ऋषि कान्त द्वारा मार गिराया गया है।

फैक्ट चेक

2 जुलाई की रात, कानपुर स्थित बिठूर इलाके के बिकरू गांव में यूपी पुलिस, विकास दुबे नामक कुख्यात अपराधी के घर दबिश करने गयी थी। लेकिन गांव में घुसते ही पुलिसकर्मियों पर विकास दुबे के गुर्गो द्वारा अंधाधुंध फायरिंग की गयी। इस घटना में सीओ देवेंद्र कुमार मिश्रा, एसओ महेश यादव, चौकी इंचार्ज अनूप कुमार, सब इंस्पेक्टर नेबुलाल और कॉन्स्टेबल सुल्तान सिंह, राहुल, जितेंद्र और बल्लू शहीद हो गए। इसी घटना पर कल से एक व्हाट्सअप फॉरवर्ड खूब शेयर किया जा रहा है। जहां एक घायल व्यक्ति की तस्वीर के साथ औरैया पुलिस के इंस्पेक्टर ऋषि कान्त द्वारा विकास दुबे का एनकाउंटर किये जाने का दावा किया गया है ।

वायरल दावे का सच जानने के लिए हमने सबसे पहले दावे के साथ साझा की जा रही तस्वीर को गूगल पर खोजने का प्रयास किया।

गूगल पर मिले परिणामों से पता चला कि यह तस्वीर विकास दुबे की नहीं है। खोज के दौरान newsgangapur.com नामक वेबसाइट पर छपे लेख से पता चला कि प्रयागराज में आकाशीय बिजली गिरने से युवक की मृत्यु हो गयी थी।

प्रयागराज में बिजली गिरने से किसी व्यक्ति की मृत्यु होने की खबर की पुष्टि के लिए हमने कुछ अन्य कीवर्ड्स की मदद से खोजना शुरू किया। इस दौरान हमें आजतक की वेबसाइट पर 4 जुलाई 2020 को छपा एक लेख भी मिला। जहाँ यह बताया गया है कि प्रयागराज में बिजली गिरने से 6 लोगों की मृत्यु हो गयी।

वायरल तस्वीर के साथ शेयर किया जा रहा दावा गलत साबित होने पर हमने अपनी पड़ताल जारी रखी। अब व्हाट्सअप पर ब्रेकिंग न्यूज़ के शीर्षक के साथ शेयर किये जा रहे, ‘विकास दुबे का औरैया पुलिस के इंस्पेक्टर ऋषि कान्त द्वारा एनकाउंटर’ वाले दावे को गूगल पर कुछ स्क्रीनशॉट के माध्यम से खोजा। जहां हमने हाल ही में औरैया पुलिस के साथ किसी अपराधी के मुठभेड़ होने की खबरों को खंगाला। खोज के दौरान मिले परिणामों से यह पता चला कि औरैया में विकास दुबे के साथ कोई मुठभेड़ नहीं हुई है। हालांकि औरैया बाईपास पर एक लावारिस कार जरूर मिली है जिसपर शक के साथ दावा किया जा रहा है कि हो सकता है कि इसी कार से विकास दुबे भाग निकला हो।

इसके साथ ही हमें मीडिया रिपोर्टों से यह भी पता चला कि विकास दुबे की आखिरी लोकेशन औरैया के पास मिली है।

गूगल पर मिले परिणामों तथा मीडिया रिपोर्टों से विकास दुबे के एनकाउंटर की कोई जानकारी नहीं मिली। लिहाजा अब हमने वायरल पोस्ट में जिस औरैया पुलिस के इंस्पेक्टर ‘ऋषि कान्त’ द्वारा दुबे का एनकाउंटर किये जाने का दावा किया जा रहा था उनके बारे में जानकारी जुटाने के लिए खोजना शुरू किया।

पड़ताल में हमें अमरउजाला की वेबसाइट पर छपा लेख एक मिला। जहां से पता चला ‘ऋषि कान्त’ 1997 बैच के अफसर हैं, जिन्होंने अब तक कुल 22 एनकाउंटर किये हैं। इन्हीं के नाम से विकास दुबे के एनकाउंटर की खबर वायरल हो रही है।

इसके बाद हमने वायरल दावे की पुष्टि के लिए औरैया के एसपी ऑफिस से सीधा इस नंबर पर (9454400249) संपर्क किया। वार्ता के दौरान उन्होंने बताया कि यह एक फेक खबर है। साथ ही उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया में ऐसी कई भ्रामक ख़बरों को फ़ैलाने के लिए FIR दर्ज करवाकर विधिक कार्रवाई की जा रही है।

ट्वीट का लिंक यहाँ देखें।

पड़ताल के दौरान कई टूल्स और कीवर्ड्स की मदद से खोजने के बाद हमें पता चला कि कानपुर में 8 पुलिसकर्मियों को मारने वाले आरोपी का अभी तक एनकाउंटर नहीं हो पाया है और ना ही वह अभी तक पुलिस के हाथ लगा है। इसलिए वायरल हो रहा दावा गलत है।

Tools Used 

  • Google Search
  • Twitter Advanced Search
  • Reverse Image Search

Result: False


(किसी संदिग्ध ख़बर की पड़ताल, संशोधन या अन्य सुझावों के लिए हमें WhatsApp करें: 9999499044  या ई-मेल करें: [email protected])



NC Hindi


main

दावा

सोशल मीडिया पर एक युवा जोड़ी की तस्वीर को इस तरह से शेयर किया जा रहा है जिससे यह संदेश फैले कि एक हिंदू शख्स ने मुस्लिम महिला से शादी की है। तस्वीर में एक शख्स माथे पर तिलक लगाए है तो वहीं उसके साथ दिख रही महिला ने हिजाब पहना है। दोनों एक-दूजे को गले लगा रहे हैं।

सच क्या है?

यह तस्वीर असल में तुर्की के एक कपल की है।

कैसे की पड़ताल?

रिवर्स इमेज सर्च के ज़रिए हमें ठीक यही तस्वीर एक वायरल ट्वीट में मिली। यह ट्वीट 6 अक्टूबर, 2020 को किया गया था। ट्वीट में इस जोड़े की कई और तस्वीरें भी थीं।

इन तस्वीरों को रिवर्स सर्च करने पर हमें ‘KUBRA BATUHAN‘ नाम के प्रसिद्ध इंस्टाग्राम अकाउंट से किए पोस्ट्स के लिंक मिले। इस अकाउंट पर ऐसी कई और तस्वीरें थीं, जिसमें यह कपल दिख रहा है।

यह तस्वीर असल में 17 मार्च, 2020 को पोस्ट की गई थी।

इस अकाउंट के कुछ पोस्ट्स और Google के ‘Detect Language’ टूल की मदद से हमने पाया कि इस अकाउंट से टर्किश भाषा में पोस्ट किए जा रहे हैं।

अकाउंट के बायो में हमें YouTube चैनल का लिंक मिला, जो कि इस कपल का ही चैनल है। इस चैनल पर कपल ने बताया है कि वे तुर्की में रहते हैं।

इन दोनों के इंस्टाग्राम प्रोफाइल यहां और यहां देखे जा सकते हैं।

निष्कर्ष

टाइम्स फैक्ट चेक ने पाया है कि तुर्की के एक प्रसिद्ध कपल का फोटो इस दावे के साथ शेयर किया जा रहा है कि एक हिंदू शख्स ने मुस्लिम महिला से शादी की।



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