2016 में “द वायर” द्वारा लिखे एक आर्टिकल का एक हिस्सा वायरल हो रहा हैं।जिसमें माँ दुर्गा के बारे में आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया गया हैं। इसपर द वायर का कहना हैं कि वो अपने विचारों को प्रमोट नहीं कर रहा हैं। बल्कि ये 2016 में स्मृति ईरानी के JNU को लेकर दिए बयान के सन्दर्भ में था।

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सोशल मीडिया पर वायरल ख़बर में यह दावा किया जा रहा हैं की पद्मशीला पति के घर की स्थिति के चलते सिलबट्टे बेच कर गुजारा करती थी। फिर उन्होंने पढ़ाई कर महाराष्ट्र में पीएसआई की परीक्षा उत्तीर्ण की और वे सब इंस्पेक्टर बन गईं। पड़ताल में हमें, पद्मशीला का नाम, निवास(भंडारा) सही मिला।परंतु हालत ख़राब होने के बावजूद उन्होंने सिलबट्टे नही बेचे। अंतत: पड़ताल में वायरल फ़ोटो भ्रामक पायी गयी।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडीयो में दावा हैं कि लोग फ़्रांस की सड़कों पर पैगंबर मोहम्मद के सम्मान में सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करते नज़र आ रहे।पड़ताल में वीडीयो नवम्बर 2019 में यमन मे पैग़म्बर मोहम्मद के जनमदिन पर हुए सेलिब्रेशन का पाया गया। जाँच में ख़बर भ्रामक पाया गयी।

सोशल मीडिया में वायरल पोस्ट के अनुसार बिहार में भाजपा की निर्मला सितारामण ने “वोट नही तो वैक्सीन नही” की बात कही हैं। विपक्षी दलों ने इस बात को लेकर जब आलोचना शुरू की तो सरकार ने स्पष्ट कर दिया की वैक्सीन पुरे भारत में मुफ़्त होगी। वहीं भाजपा प्रवक्ता का कहना हैं कि वोटिंग का कोविड-19 वैक्सीन से कोई लेना-देना नहीं है।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडीयो में दावा हैं की फ़्रेंच टीचर की एक टिनेजर द्वारा हत्या के बाद नमाज़ी सड़क पर उतर आए और नमाज़ पढ़ने लगे। जवाब में फ़्रांसी लोगों ने ऊँची आवाज़ में राष्ट्रगान पढ़ा।पड़ताल में वीडीयो 2017 का मिला। जब पेरिस में रोड पर नमाज़ पढ़ने करीब 2,000 लोग जमा हुए थे। विरोध में फ़्रांस नेता ने सार्वजनिक स्थानो का ग़लत प्रयोग होने पर राष्ट्रगान गाया था।

सोशल मीडिया पर वायरल स्क्रीनशाट के अनुसार कोविड-19 टेस्टिंग पेटेंट साल 2015 में ही दाखिल कर दिया गया था, कोविड—19 एक स्कैम है।।वायरल स्क्रीनशॉट 2020 में दाखिल की गई चाइल्ड एप्लिकेशन की तस्वीर है। एप्लिकेशन को साल 2020 में संशोधित कर फिर से दाखिल किया था। पड़ताल में यह ख़बर झूठी पाई गयी की कोविड की टेस्टिंग 2015 में फ़ाइल की गयी थी।

NSUI के पूर्व नेता अशोक बसोया ने ट्विटर पर एक वीडीयो पोस्ट कर उसे दिल्ली का बताया। वीडीयो में एक सख्श महिला पर ज़ोरदार हमला करते नज़र आ रहा हैं।कैप्सन में वह CM केजरीवाल और PM मोदी पर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर तंज कसते हैं। पड़ताल में यह वीडीयो फ़रवरी 2019 में मलेशिया के क्वालालंपुर में तमन मुतिअरा मेट्रो स्टेशन का मिला।

सोशल मीडिया पर तस्वीरों को वायरल कर उसे पाकिस्तान की वर्तमान राजनीतिक उथलपुथल का बताया गया हैं।पड़ताल में यह तस्वीरें 2016 में सीरिया में हुए “बैटल ऑफ़ अलेप्पो” की पायी गयी, जिसे ख़ुद सिरियाई समाचार एजेंसी SANA ने अपलोड किया था। अंतत: वायरल ख़बर जाँच में ग़लत पायी गयी।

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सोशल मीडिया पर वायरल मैसेज में जियों की तरफ़ से 20 साल के एक कथित एग्रीमेंट के तहत वन टाइम पेमेंट के तौर पर 40 लाख रुपये।वही ₹25000 महीने का किराया , साथ ही ₹12000 महीने की सैलरी की एक गार्ड की नौकरी देना का दावा किया था। पड़ताल में यह दावा झूठा निकला।जियों ने ख़ुद इस ख़बर को ट्वीट कर फ़र्ज़ी बताया।

सोशल प्लेटफ़ार्म ऐसा माध्यम है, जिससे ख़बरें और संदेश तेज़ गति से फैलाया जा सकता हैं।परंतु फ़ेक न्यूज़ का क़ब्ज़ा सोशल मीडिया पर भारी पड़ रहा है।फ़ेसबुक की तरफ़ से बीजेपी के कई फ़ेक, फ़र्ज़ी ख़बरें फैलाने वाले अकाउंट्स पर कोई कारवाई नही की गयी। WSJ में छपे आर्टिकल के अनुसार फ़ेसबुक ने हेट स्पीच के नियम चुनिंदा अकाउंट्स पर लागू नहीं किये और ना उनपर रोक लगाई गयी।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडीयो में सुडान में फ़्रांस एम्बेसी को आग लगाते दिखाया गया हैं। दावा हैं कि एम्बेसी इसलिए जलाया गयी, क्यूंकि हाल में फ़्रांस के टीचर ने पैगम्बर मोहम्मद का कार्टून दिखाया था, जिस वजह से टीनेजर ने उनकी हत्या कर दी। पड़ताल में वीडीयो 2012 में सूडान में US की फ़िल्म के ट्रेलर में इस्लाम विरोधी दृश्य के विरोध में हुए हिंसक प्रदर्शन का पाया गया।

बिहार चुनाव में फ़ेक न्यूज़ का अंबार लगा हुआ हैं इसी कड़ी में एक वीडीयो और वायरल हो रहा हैं जिसमें शत्रुघन सिन्हा को कांग्रेस के लिए प्रचार करते सुना जा सकता हैं। दावा हैं की वीडीयो हालिया बिहार चुनाव का हैं,जिसे देख मोदी और योगी का पत्ता बिहार में साफ़ हैं। पड़ताल में यह वीडीयो दिसेंबर 2019 झारखंड चुनाव का निकला।
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सोशल मंच  पर वायरल तस्वीर में मीडिया की OB वैन जलती दिखाई दे रही हैं।दावा हैं कि वीडीयो हाथरस मामले के समय का हैं। पड़ताल में यह ख़बर दिसंबर 2019 के CAA-NRC  प्रदर्शन के दौरान लखनऊ के हज़रतगंज  में हुई हिंसा की निकली। 

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सोशल मीडिया पर वायरल ख़बर के अनुसार  एक वेबसाइट पर KVMS (किसान विकास मित्र समिति) द्वारा किसानो के लिए रोजगार के अवसर कृषि मंत्रालय के अंतर्गत बनाए जाने का दावा किया गया था।PIB के फ़ैक्ट चेक में यह ख़बर फ़र्ज़ी पायी गयी। कृषि मंत्रालय की तरफ़ से ऐसी कोई वेबसाइट नही बनाई गयी हैं।

सोशल प्लेटफ़ार्म पर वायरल ख़बर में मृत विकास दुबे का नाम महमूद और चंद्रशेखर आज़ाद का नसिमुद्दीन खान बताया गया हैं। वायरल तस्वीर में दिख रहें व्यक्ति का नाम विनय दुबे हैं।वही चंद्रेशेखर के प्रवक्ता ने दावे को ग़लत बताया और साइबर क्राइम में शिकायत पत्र भी डालने की बात बतायी। पड़ताल में यह दावा ग़लत साबित हुआ।

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सोशल मीडिया पर एक तस्वीर में नाइजीरिया के लोग “जस्टिस फ़ार सुशांत” प्लेकार्ड ले कर प्रदर्शन करते दिखाई दे रहे हैं। पड़ताल में यह तस्वीर नाइजीरिया में पुलिस की इकाई “सार्स” के ख़िलाफ़ हो रहें प्रदर्शन की पाई गयी। नतीजन वायरल हो रही तस्वीर एडिटेड हैं और प्रदर्शन का दावा भी फ़र्ज़ी हैं।

बूम: फ़ेक और वायरल न्यूज़ की फैक्ट चेकिंग, ऑनलाइन न्यूज़ अपडेट

वायरल तस्वीर में चीर हरण के दौरान द्रौपदी कृष्ण जी को पुकार रही हैं और कृष्ण एक लम्बी-साड़ी आनलाइन के माध्यम से आर्डर कर रहें हैं। पड़ताल में यह तस्वीर 2016 की पाई गयी।जिसे स्क्राल ड्रोल नामक कंटेंट क़्रिएटिंग वेबसाइट ने बनाया था।मिंत्रा ने ख़ुद ट्वीट कर ख़बर का खंडन किया।स्क्राल ड्रोल ने भी निंदा के बाद माँफी माँगी थी।
 

सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रही तस्वीर में यह दावा किया जा रहा हैं कि पंजाब के पठानकोट के एक रामलीला पंडाल में जमकर तोड़फोड़ की गयी।दरअसल, यह तस्वीर 2018 में भारतीय मंदिर सिडनी में हुए हमले की हैं।असल ख़बर ये हैं कि पठानकोट के कोठे मनवाल में शराबीयों ने रामलीला में हूड़दंग मचाया था।

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NEET 2020 के परिणाम में पहला स्थान प्राप्त करने वाले शोएब आफ़ताब के अलावा 4 और नाम वायरल।लोगों ने आकांक्षा सिंह के रैंक 2 आने पर सवाल उठाए तो NEET इंफ़ारमेशन बुलेटिन में कहा गया कि टाई ब्रेक करने के लिए उम्र को दी जाती हैं तरजीह। हालाँकि NEET 2020 के परिणामों मेंटॉप वायरल 4 कैंडिडेट में किसी का नाम नही। 

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सोशल मीडिया यूज़र ने एक तस्वीर अपलोड करते हुए दावा किया हैं कि BJP-JDU ने बिहारवासीयो के लिए शराब की बोतलें चुनाव में बटवाने के लिए मँगवाई हैं। दरअसल, थाईलैंड की एक पुरानी तस्वीर को बिहार का बता कुछ लोग कर रहे थे वायरल।पड़ताल में यह ख़बर फ़र्ज़ी पाई गयी।

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