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Exposed 3! सीता का स्वयंवर क्या सच में हुआ था ? हैरत में डाल देगा आपको सच! Did Sita’s swayamvar really happen? The truth is bound to surprise you!

  • सीता का स्वयंवर इतिहास में हुआ एक अनूठा किस्सा है जो कि लोगों के मन में अमर हो गया है। स्वयंवर में हिस्सा लेने कई जाने माने राज्यों से कई विद्यमान पुरुष आते हैं। शिव जी का धनुष सभा के बीच रखा जाता है।
  • जो भी इस धनुष को उठाने में सामर्थ्य होता, वही सीता के वर के रूप में चुना जाता।
  • राजकुमारी सीता उस धनुष को आसानी से उठा लिया करती थीं। कई बड़े बड़े राजाओं ने धनुष को उठाने का प्रयत्न तो किया मगर विफल हो गए।
  • उसी समय दो साधु की वस्त्रभूषा में राजकुमार पधारते हैं जो कि स्वयंवर में भाग लेने की मंशा से नहीं आए थे।
  • उसके पश्चात उनमें से एक राजकुमार राम ने न सिर्फ धनुष को उठा लिया बल्कि उसे तोड़ भी दिया जिसके चलते उन्हें सीता का योग्य वर चुना गया।
  • इसके पश्चात राजकुमार राम और राजकुमारी सीता का विवाह सम्पन्न हुआ, जिसमें सभी 14 लोकों के लोग सम्मिलित हुए।

क्या वाल्मीकि रामायण में सीता के स्वयंवर का उल्लेख है? Does Valmiki Ramayana describe Sita’s Swayamvar?

  • हैरान करने वाली बात यह है कि वाल्मीकि रामायण में sita के swayamvar का कोई उल्लेख नहीं किया गया है।
  • वाल्मीकि रामायण के अनुसार सीता के लिए वर ढूँढने के लिए धनुष यज्ञ किया गया था जिसके तहत जो भी शिव जी के धनुष को उठाने में सफल होगा, राजा जनक उसके साथ अपनी बेटी सीता का विवाह कर देंगे।
  • हालांकि इसका वर्णन स्वयंवर के रूप में नहीं किया गया है। इसके तहत साल भर तक कई राज्यों के राजा ने मिथिला पहुँच धनुष को उठाने का प्रयास किया था परंतु विफल होने पर अपने राज्य को लौट गए थे।
  • गौरतलब है कि सभी राजा एक ही दिन धनुष उठाने के लिए उपस्थित नहीं हुए थे जैसा कि आजकल के लोगों द्वारा मान्य है।

लक्ष्मण और महर्षि विश्वामित्र सहित मिथिला पहुंचे राम

  • काफी समय बाद राजकुमार राम और लक्ष्मण महर्षि विश्वामित्र के साथ इस यज्ञ को देखने आए।
  • विश्वामित्र ने राजा जनक से राजकुमारों को धनुष दिखाने का आग्रह किया।
  • राजा जनक ने दोनों भाइयों के सामने धनुष प्रस्तुत किया। राम ने आँख झपकने से पहले, जो कई महाबली राजा नहीं कर पाए थे, उस धनुष को उठा लिया और निशान भी साध लिया।
  • हालांकि ज़ोर के साथ निशान साधते हुए धनुष बीच से टूट गया और उसके दो टुकड़े हो गए।
  • तत्पश्चात राजा जनक ने अपनी पुत्री सीता का विवाह राजकुमार राम के साथ तय कर दिया।
  • हालांकि राम ने बिना अपने पिता की सहमति से विवाह न करने की बात कही। इसके बाद राजा दशरथ को अयोध्या से बुलाया गया जिसके बाद दोनों के विवाह पर सहमति हुई।

फिर कहाँ हुआ सीता के स्वयंवर का उल्लेख? Then where was Sita’s Swayamvar mentioned?

  • इसके बाद प्रश्न यह उठता है कि आखिर sita के swayamvar का वर्णन किया कहाँ गया है जिसके पश्चात वह इतना लोकप्रिय हो गया?
  • उत्तर है तुलसीदास रचित रामचरित मानस। तुलसीदास रामायण में sita के swayamvar का उल्लेख मिलता है जिसके बाद इसे आधार मानते हुए आगे चलकर प्रकाशित हुए रामायण के कई दूसरे संस्करणो में लिखा गया है।
  • हालांकि लोगों के मन में इसके अमर होने की यह भूमिका रामनन्द सागर द्वारा रचित सीरियल रामायण को जाती है।
  • रामायण को जब दिखाया गया था तो इसे लोगों का काफी प्यार मिला था। इस कारण इसमें जो भी दिखाया गया, वह लोगों के दिल में बस कर अमर हो गया।
  • इसी तरह दिखाया गया सीता का स्वयंवर भी लोगों के दिल में घर कर बस गया और लोगों को सच कभी ज्ञात ही नहीं हुआ की सीता का स्वयंवर दरअसल कभी हुआ ही नहीं था ।

# लिखा गया लेख दिए गए स्त्रोत की मदद से लिखा गया है । इस लेख की मंशा किसी भी पढ़ने वाले की भावनाओं को ठेंस पहुंचाना नहीं है । लेख द्वारा अगर किसी को ठेंस पहुंची हो, उसके लिए हमें खेद है ।