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Exposed 1! क्या सीता(Sita) थी फ़र्ज़ी खबर की पहली शिकार? जानिए चौकाने वाला सच !

Sita Mata
मौजूदा समय में लगभग हर क्षेत्र में फ़र्ज़ी खबरों की तादाद दिन प्रति दिन बढ़ती ही जा रही है। हर क्षेत्र में लोग इंटरनेट का दुरुपयोग कर फ़र्ज़ी खबरों को फैला रहे हैं और लोगों को झांसा देने में कामयाब भी हो रहे हैं।
हालांकि यह प्राचीन काल से चला आ रहा है । ऐसे में यह जानना काफी दिलचस्प होगा की इस फ़र्ज़ी खबर का सबसे पहला शिकार कौन हुआ था।
रामायण के आखरी अध्याय में राम रावण को मारकर अयोध्या लौटते हैं और उन्हें राजा बनाया जाता है। राजा बनने के बाद उन्हें अपने संदेशवाहकों से पता चलता है कि अयोध्या की जनता उनकी धर्मपत्नी सीता (sita) के चरित्र के बारे में तरह तरह के लांछन्न लगा रही है।
हरण होने के बाद सीता (sita)ने चार महीने रावण के महल में किस तरह बिताए, इस बात का ज्ञान किसी को न होने के बावजूद लोग उनके और उनके चरित्र के बारे में अफवाहें फैलाने लगे।
फैल रही इन अफवाहों और फ़र्ज़ी खबरों के झांसे में आकर कई लोग सीता (sita) के चरित्र पर संदेह करने लग गए और कहने लगे कि ऐसे चरित्र वाली रानी को राजा के पास बैठने का कोई अधिकार नहीं होना चाहिए।
यह सुन राम को काफी दुख होता है की उनकी धर्मपत्नी के ऊपर इस तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं। अंततः वह सीता (sita) को अयोध्या से निष्कासित करने का फैसला लेते हैं।
यह खबर सुन सीता (sita) के दिल को गहरी ठेंस पहुँचती है। निष्कासित करने के बाद लक्ष्मण सीता को महारिशी वाल्मीकि के आश्रम छोड़ने जाते हैं और वहाँ पहुंचकर उन्हें कहते हैं कि वह अब अयोध्या नहीं लौट सकतीं और न ही किसी को बता सकती हैं कि वो राम की पत्नी है।
तत्पश्चात सीता वाल्मीकि के आश्रम में ही दो पुत्रों को जन्म देती हैं – लव और कुश और उन्हें वहीं पाल पोसकर बड़ा करती हैं और इस दौरान कभी अपनी या अपने बच्चों की असली पहचान किसी को नहीं बताती हैं। आश्रम में ही वाल्मीकि रामायण का सृजन करते हैं।
सीता (sita) को निष्कासित करने का बखान करता यह अध्याय काफी विवादास्पद साबित हुआ। कई लोग इसे न मानते हुए राम के अयोध्या आने को ही रामायण का अंत मानते हैं।
वहीं दूसरी ओर वो लोग हैं जिनके हिसाब से यह अध्याय राम के चरित्र का बखान करता है और उन्हें खुदकी भावनाओं को त्याग कर राज्य के हित में फैसला लेने वाला महान राजा स्थापित करता है।
हालांकि इस अध्याय से अन्याय के प्रश्न उठने लगे।
सीता जो कि महल का मोह छोड़ अपने पति परमेश्वर राम के साथ बिना किसी संकोच के वनवास में चली गई, जिन्होंने अग्नि परीक्षा देकर अपनी पवित्रता का तक सबूत दिया, उनका रावण के चंगुल से छूटने के बाद महज़ अफवाहों के बिनाह पर निष्कासित हो जाना अन्याय माना जाने लगा।
केवल फ़र्ज़ी खबरों और अफवाहों ने सीता को अपने ही पति से दूर कर दिया और वो भी तब जब वो गर्भवती थीं।
सीता के खिलाफ अफवाहों और फ़र्ज़ी खबरों के प्रचलन के कारण हुआ यह अन्याय आजकल की ज़िंदगी में भी देखा जा सकता है जहां किसी व्यक्ति के ऊपर झूठा आरोप लगाकर उसकी सालों में कमाई हुई इज़्ज़त के चिथड़े उड़ा दिए जाते हैं।
चरित्र पर लगाए हुए आरोप जिनकी सच्चाई का कोई गवाह न हो, उनसे कई लोग अपना रोजमर्रा का काम खो देते हैं, भले ही उस आरोप में कोई सच्चाई न हो लेकिन उनकी इज़्ज़त , मान और सम्मान को तब तक ठेंस पहुँच चुकी होती है।
जब तक कोई ठोस सबूत न हो, तब तक किसी के ऊपर आरोप लगाना उस व्यक्ति की कमाई हुई इज़्ज़त की धज्जियां उड़ा देता है और अधिकांश समय इसे वापिस कमाना नामुमकिन हो जाता है।
https://economictimes.indiatimes.com/magazines/panache/fake-news-was-sita-the-first-victim/articleshow/67292970.cms?from=mdr

# लिखा गया लेख दिए गए स्त्रोत की मदद से लिखा गया है । इस लेख की मंशा किसी भी पढ़ने वाले की भावनाओं को ठेंस पहुंचाना नहीं है । लेख द्वारा अगर किसी को ठेंस पहुंची हो, उसके लिए हमें खेद है ।