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फैक्ट चेक: भारत में निपाह वायरस को लेकर WHO की वायरल चेतावनी है दो साल पुरानी – Fact check viral warning of who about nipah virus in india is two years old – Aaj Tak

भारत में कोविड-19 के केस लगातार बढ़ते जा रहे हैं. इसी बीच सोशल मीडिया पर निपाह वायरस को लेकर एक मैसेज वायरल हो रहा है. इस मैसेज में दावा किया जा रहा है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने अब भारत में निपाह वायरस के प्रकोप की चेतावनी दी है, जो कोरोना वायरस की तुलना में ज्यादा खतरनाक है.

इस वायरल मैसेज को हाल में कई फेसबुक यूजर ने शेयर किया है. इस पोस्ट के साथ कुछ लोगों ने “द न्यूयॉर्क टाइम्स” के एक आर्टिकल का लिंक शेयर किया है, जिसका शीर्षक है, “दुर्लभ और खतरनाक निपाह वायरस भारत में फैला”.

इंडिया टुडे के एंटी फेक न्यूज वॉर रूम (AFWA) ने पाया कि पोस्ट में किया जा रहा दावा भ्रामक है. भारत में निपाह वायरस के प्रकोप को लेकर डब्ल्यूएचओ का आखिरी अलर्ट अगस्त, 2018 में आया था.

इन पोस्ट के आर्काइव यहां , यहां और यहां देखे जा सकते हैं.

द न्यूयॉर्क टाइम्स ” का जो आर्टिकल इसके साथ शेयर किया जा रहा है, वह 4 जून, 2018 को प्रकाशित हुआ था. इस रिपोर्ट के मुताबिक, निपाह (NiV) वायरस में एक महामारी में तब्दील होने की क्षमता थी, क्योंकि तब केरल में निपाह से संक्रमित 18 लोगों में से 17 की मौत हो गई थी.

डब्ल्यूएचओ की सबसे ताजा चेतावनी में 7 अगस्त, 2018 को कहा गया था कि केरल में उस वर्ष 17 जुलाई तक, 19 मामले दर्ज किए गए थे, जिनमें से 17 लोगों की मौत हो गई थी. लेकिन इसमें यह भी कहा गया था, “केरल में 1 जून 2018 से लेकर 30 जुलाई तक कोई नया केस या इससे होने वाली मौत का मामला सामने नहीं आया है और इंसानों से इंसानों में फैलने वाले निपाह के संक्रमण को रोक लिया गया था.”

निपाह जानवरों से इंसानों में फैलने वाला (zoonotic) वायरस है, लेकिन यह प्रदूषित भोजन से या सीधे इंसानों से इंसानों में भी फैल सकता है. संक्रमित लोगों में यह बिना लक्षण वाले संक्रमण से लेकर गंभीर सांस संबंधी बीमारी और खतरनाक इंसेफेलाइटिस जैसी बीमारियों का कारण बनता है.

निपाह वायरस के संक्रमण में मृत्यु दर काफी ज्यादा है. डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, इसकी केस फैटेलिटी रेट यानी संक्रमण की मृत्यु दर 40-75 फीसदी तक है.

इसलिए वायरल मैसेज का यह दावा भ्रामक है कि डब्ल्यूएचओ ने अब भारत में निपाह वायरस के प्रकोप को लेकर चेतावनी दी है. यह चेतावनी दो साल पुरानी है और डब्ल्यूएचओ की ओर से हाल-फिलहाल में ऐसी कोई चेतावनी जारी नहीं की गई है.

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